Hisar: बेटियों को मजबूत बनाने के लिए सोच बदलने की जरूरत

जिंदगी एक बार मिलती है और यह ईश्वर तय करता है कि इंसान किस रूप में इस दुनिया में आएगा, लेकिन समाज आज भी लड़का और लड़की में भेद करना नहीं छोड़ पाया है। नारी, जिससे जीवन की शुरुआत होती है, वही आज भी समान अधिकार, सुरक्षा और सम्मान के लिए संघर्ष कर रही है। बेटियों को कमजोर समझने की सोच और घरेलू भेदभाव समाज की जड़ में आज भी मौजूद हैं। नेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे के अवसर पर शुक्रवार को अमर उजाला कार्यालय में नारायणी वेलफेयर सोसाइटी के साथ अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और सोच बदलने का आह्वान किया। हम दो बहनें हैं, लेकिन हमारे माता-पिता ने कभी हमें कमजोर महसूस नहीं होने दिया। हमें बराबरी का प्यार, भरोसा और सुविधाएं मिलीं। उन्होंने यह नहीं कहा कि तुम लड़की हो, बल्कि यह सिखाया कि तुम कर सकती हो। जब परिवार बेटियों पर विश्वास करता है तो बेटियां हर चुनौती पार कर लेती हैं। बेटा और बेटी दोनों को समान अधिकार और अवसर मिलना चाहिए।-गुंजन गोयल, फाउंडर जिंदगी हमें एक ही बार मिलती है और यह ईश्वर तय करता है कि हम किस रूप में जन्म लेंगे। लड़की होना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि ईश्वर की सबसे बड़ी शक्ति है। नारी से ही जीवन की शुरुआत होती है, फिर भी समाज उसी में भेद करता है। बेटी बोझ नहीं, बल्कि समाज की नींव है। अगर इंसान सच में तरक्की चाहता है तो उसे नारी को सम्मान, समानता और अधिकार देना ही होगा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 23, 2026, 16:12 IST
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