मेरा गांव, मेरी शान: इतिहास की धरोहर समेटे बालसमंद, अंग्रेजों के दौर की पुलिस चौकी आज भी गवाह, गौरवशाली है इतिहास
बालसमंद/हिसार। हरियाणा-राजस्थान सीमा पर हिसार शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित बालसमंद गांव अपने गौरवशाली इतिहास, सामाजिक सौहार्द और आधुनिक सुविधाओं के लिए पूरे क्षेत्र में अलग पहचान रखता है। यह गांव इतिहास, संस्कृति, शिक्षा, कृषि और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। गांव में आज भी अंग्रेजों के शासनकाल की पुलिस चौकी, प्राचीन मंदिर और कई ऐतिहासिक धरोहरें इसकी समृद्ध विरासत की गवाही देती हैं। ग्रामीणों के अनुसार बालसमंद की स्थापना सन 1063 ईस्वी में रतन सिंह ने की थी। बताया जाता है कि वे मध्य प्रदेश के चित्रकूट से होकर अग्रोहा आए और बाद में यहां आकर बालसमंद गांव बसाया। करीब एक हजार वर्ष पुराना यह गांव आज हिसार जिले के सबसे बड़े और प्रमुख गांवों में गिना जाता है। गांव के नाम को लेकर बुजुर्गों में अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। ग्रामीणों के अनुसार पहले गांव के चारों ओर दूर-दूर तक बालू के ऊंचे टिब्बे थे। लोग इस क्षेत्र को बालू का समंदर कहते थे और धीरे-धीरे यही नाम बदलकर बालसमंद हो गया। कुछ बुजुर्ग बताते हैं कि गांव का नाम भगवान बालाजी की आस्था से जुड़ा है। उनका मानना है कि सालासर बालाजी मंदिर में प्रज्ज्वलित जोत भी कभी बालसमंद से ही ले जाई गई थी। 18,000 से अधिक आबादी वाला बड़ा गांव वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार गांव की आबादी 12,835 है और क्षेत्रफल लगभग 6,838 हेक्टेयर है। गांव में जाट, ब्राह्मण, जांगड़ा, गोयल, वाल्मीकि, खटीक, कासनिया, आर्य सहित लगभग सभी समाज के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते हैं। ग्रामीणों के अनुसार अब गांव की आबादी करीब 18,000 है। हनुमान, जीण माता और शिव मंदिर हैं आस्था के प्रमुख केंद्र बालसमंद धार्मिक दृष्टि से भी काफी समृद्ध है। यहां स्थित हनुमान मंदिर करीब 200 वर्ष पुराना है जहां प्रत्येक पूर्णिमा को विशाल मेला लगता है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। प्राचीन शिव मंदिर लगभग 100 वर्ष पुराना माना जाता है। गांव में जीण माता मंदिर, आर्य समाज मंदिर और दो मस्जिदें भी सामाजिक सद्भाव की मिसाल हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 08, 2026, 17:58 IST
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