स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले बोले- साहस, शौर्य और बलिदान के प्रतीक हैं गुरु तेग बहादुर

गुरु तेग बहादुर साहिब जैसा बलिदानी कोई नहीं है। उन्होंने धर्म, मानवता और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था। ये बातें मोतीझील परिसर में श्री गुरुतेग बहादुर साहिब जी के शहीदी दिवस के उपलक्ष्य पर चल रहे तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहीं। उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेका। श्री गुरु सिंह सभा महानगर के पदाधिकारियों ने उन्हें सरोपा देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि साहस, शौर्य और बलिदान के प्रतीक गुरु तेग बहादुर जी ने औरंगजेब की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध डटकर मुकाबला किया। औरंगजेब के आदेश पर उनको यातनाएं दी गईं, धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाया गया। इसके बावजूद वह अपने मार्ग से डिगे नहीं। सोमवार को मोतीझील परिसर में सुबह से ही पंडाल में दीवान सज गए। यहां रागी जत्थों ने शबद कीर्तन, कथा कीर्तन और गुरुवाणी से संगत को निहाल किया। यहां सेवादार लंगर की तैयारी के लिए देर रात तक लगे रहे। संरक्षक व पूर्व एमएलसी कुलदीप सिंह ने कहा कि मंगलवार को मोतीझील में लाखों भक्त लंगर छकेंगे। सिख समाज के लिए पूर्व एमएलसी ने होसबाले से कई मांगें कीं। इसमें शोधपीठ की स्थापना और वहां पर डिग्री कोर्स के साथ पीएचडी कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय शोध का केंद्र बनाने के लिए विश्वविद्यालय को 25 करोड़ रुपये देने के लिए कहा। पंजाबी संस्कृति और गुरुओं की ओर से देशभक्ति के दर्शाए गए मार्ग को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए दो एकड़ जमीन के आवंटन की मांग की।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 24, 2025, 21:51 IST
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