Bilaspur: जिले में प्रतिदिन हो रहा 30,446 लीटर दूध का उत्पादन, दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादकों के हित में लागू किया गया न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने गाय के दूध का एमएसपी 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया है। इस फैसले से जिले के हजारों पशुपालकों को सीधा लाभ मिल रहा है और उनकी आय में स्थिरता के साथ बढ़ोतरी भी दर्ज की जा रही है। जिले में वर्तमान में 7490 पशुपालक प्रतिदिन 30,446 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। इसमें कामधेनु हितकारी मंच नम्होल और कहलूर मिल्क उत्पादक को-ऑपरेटिव सोसाइटी नम्होल जैसी संस्थाओं की भी अहम भूमिका है। एमएसपी लागू होने के बाद पशुपालकों को बाजार के उतार-चढ़ाव और मोल भाव से राहत मिली है। अब उन्हें अपने उत्पाद का तय और उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे पशुपालन के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बदलाव साफ दिखाई दे रहा है, जहां पशुपालन आजीविका का प्रमुख साधन बनता जा रहा है। चंगर निवासी दुग्ध उत्पादक किशन लाल बताते हैं कि उन्होंने दो भैंसें पाल रखी हैं और रोजाना 4 से 5 लीटर दूध बेचते हैं। उनके अनुसार अब दूध घर से ही अच्छे दामों में बिक जाता है, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इसी तरह लखनपुर निवासी पानो देवी का कहना है कि वह गाय और भैंस दोनों का पालन करती हैं और रोजाना दूध बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। जुखाला क्षेत्र के धमथल गांव की रीना देवी भी सरकार के इस निर्णय को पशुपालकों के लिए लाभकारी बताते हुए कहती हैं कि अब उन्हें मेहनत का सही मूल्य मिल रहा है। पशुपालकों का मानना है कि दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य में समय-समय पर हो रही बढ़ोतरी से उनकी आय में लगातार सुधार हो रहा है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिला है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 20, 2026, 14:01 IST
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