US: दुनियाभर के दुर्लभ खनिज पर नजरें गड़ाए है अमेरिका! मार्को रूबियो बोले- हमारी कूटनीति का प्रमुख आधार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) अब अमेरिकी कूटनीति का एक प्रमुख आधार बन गए हैं। दुनिया भर में स्थित अमेरिकी दूतावास अब आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने और चीन पर निर्भरता कम करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश विभाग और संबंधित कार्यक्रमों पर प्रतिनिधि सभा की विनियोग उपसमिति के सामने गवाही देते हुए रूबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने महत्वपूर्ण खनिजों को अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। उन्होंने कहा कि चीन के साथ प्रतिस्पर्धा अब केवल व्यापार और प्रौद्योगिकी तक सीमित नहीं है, बल्कि रणनीतिक संसाधनों तक भी फैल चुकी है। ये भी पढ़ें:Tariff:भारत समेत 60 देशों पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा अमेरिका, लगाए बेतुके आरोप अमेरिकी कूटनीति का प्रमुख हिस्सा बने दुर्लभ खनिज मार्को रूबियो ने कहा, "दुनिया भर में हर अमेरिकी दूतावास में महत्वपूर्ण खनिज हमारी कूटनीति का एक प्रमुख हिस्सा हैं।"उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों को उन्नत विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा प्रणालियों, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के भविष्य के लिए बेहद जरूरी बताया। उन्होंने बताया कि अमेरिका विभिन्न क्षेत्रों में अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर वैकल्पिक आपूर्ति शृंखलाएं विकसित कर रहा है, ताकि खनन, शोधन और प्रसंस्करण में चीन के वर्चस्व से पैदा हुई कमजोरियों को कम किया जा सके। उन्होंने हाल की कूटनीतिक पहलों का भी जिक्र किया, जिनमें खनिज सुरक्षा और सहयोग पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय बैठकें शामिल हैं। तीन दर्जन से ज्यादा देशों के साथ बातचीत रूबियो ने कहा, "दुर्लभ खनिज को लेकरमंत्रिस्तरीय बैठक में तीन दर्जन से अधिक देशों ने भाग लिया था।" उनके अनुसार, अमेरिका की रणनीति केवल खनिज भंडारों तक पहुंच हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन के बाहर प्रसंस्करण और शोधन क्षमता बढ़ाने पर भी केंद्रित है। उन्होंने कहा कि इन सामग्रियों को इस्तेमाल योग्य उत्पाद में बदलने की क्षमताभी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। यह आर्थिक तथा राष्ट्रीय सुरक्षा योजना का अहम हिस्सा है।रूबियो ने बताया कि अमेरिकी राजनयिक अब दुनियाभर की सरकारों के साथ मिलकर आपूर्ति शृंखला की कमजोरियों की पहचान कर रहे हैं और देशों को निवेश तथा विकास के वैकल्पिक स्रोतों से जोड़ने का काम कर रहे हैं। चीन को बताया विकासशील देशों के लिए बड़ी चुनौती अमेरिकी विदेश मंत्री नेकहा कि बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास की तलाश करने वाले कई देशों के पास अक्सर चीन समर्थित परियोजनाओं के अलावा बहुत कम विकल्प होते हैं।रूबियो ने कहा, "वहां केवल चीनी कंपनियां ही पहुंचती हैं।" उन्होंने इसे कई विकासशील देशों के सामने मौजूद एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इसी कारण अमेरिका खनन, प्रसंस्करण, परिवहन और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी और सहयोगी देशों के विकल्पों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है।इस प्रयास के तहत वित्तीय साधनों और समान सोच वाले देशों के साथ साझेदारी का इस्तेमालकिया जा रहा है, ताकि विशेष रूप से खनिज संसाधनों से समृद्ध क्षेत्रों में रणनीतिक परियोजनाओं को समर्थन दिया जा सके। ये भी पढ़ें:क्या मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं:मार्को रूबियो का बड़ा खुलासा, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने को लेकर कही ये बात रणनीतिक जोखिम पैदा कर रहीएक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता रूबियो ने कहा कि आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा को लेकर चिंताएं अब केवल खनिजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन अन्य क्षेत्रों तक भी फैल चुकी हैं जहां उत्पादन अत्यधिक रूप से कुछ ही स्थानों पर केंद्रित हो गया है।उन्होंने कहा, "कुछ उद्योगों में अत्यधिक केंद्रीकरण हो गया है।" उन्होंने चेतावनी दी कि किसी एक आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता आर्थिक और रणनीतिक जोखिम पैदा करती है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि दुनिया भर की सरकारें इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति सुरक्षित करने की कोशिश कर रही हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 03, 2026, 06:41 IST
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