अध्ययन में बड़ा खुलासा: महिला प्रधान पेशों में वेतन अब भी कम, सामाजिक सोच बड़ी वजह
महिलाओं और पुरुषों के बीच वेतन असमानता केवल शिक्षा, अनुभव या कार्य के प्रकार का परिणाम नहीं है। नए अध्ययन में सामने आया है कि जिन पेशों में महिलाओं की संख्या अधिक होती है, उन्हें समाज कम मूल्यवान मानता है और इसी कारण उन व्यवसायों के लिए अपेक्षाकृत कम वेतन तय किया जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह प्रवृत्ति अनजाने में भी वेतन भेदभाव को बढ़ावा देती है। यह निष्कर्ष अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सांता बारबरा, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी अबू धाबी सहित चार विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आया है। यह अध्ययन रिसर्च इन सोशल स्ट्रैटिफिकेशन एंड मोबिलिटी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।शोध के अनुसार अमेरिका में महिलाएं औसतन पुरुषों की तुलना में प्रति डॉलर लगभग 85 सेंट ही कमा पाती हैं और यह अध्ययन इस अंतर के पीछे छिपे सामाजिक कारणों को समझने का प्रयास करता है। समाजशास्त्र में लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि महिलाओं से जुड़े कार्यों का आर्थिक और सामाजिक मूल्यांकन अपेक्षाकृत कम किया जाता है। इसे डीवैल्यूएशन हाइपोथीसिस कहा जाता है। इस सिद्धांत के अनुसार जैसे-जैसे किसी पेशे में महिलाओं की संख्या बढ़ती है, वैसे-वैसे उस पेशे का वेतन स्तर भी अपेक्षाकृत कम हो जाता है। पुरुष और महिलाओं की सोच में नहीं मिला अंतर शोध का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी रहा कि यह पूर्वाग्रह केवल पुरुषों तक सीमित नहीं था। महिला प्रतिभागियों ने भी महिला प्रधान बताए गए पेशे के लिए अपेक्षाकृत कम वेतन का सुझाव दिया। शोधकर्ताओं के अनुसार इससे संकेत मिलता है कि यह किसी एक लिंग का नहीं, बल्कि समाज में गहराई तक मौजूद सांस्कृतिक सोच का प्रभाव है, जो अनजाने में निर्णयों को प्रभावित करती है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 21, 2026, 05:41 IST
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