अमेरिका ने आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से हटाए सभी बमवर्षक: क्यों उठाया यह कदम; ट्रंप ने ईरान पर अब क्या कहा?
अमेरिका की वायुसेना ने इंग्लैंड में स्थित अपने एक सैन्य एयरबेस से सभी बमवर्षक विमान वापस बुला लिए हैं। यह एयरबेस अमेरिकी नियंत्रण में है। यहां से ईरान पर हमले किए गए थे। यह कदम आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस पर कथित आतंकी हमले की साजिश की जांच के बाद उठाया गया है। पेंटागन के एक अधिकारी के मुताबिक, बमवर्षक विमानों को अमेरिका में उनके अपने ठिकानों पर वापस भेज दिया गया है। अधिकारी को संवेदनशील सैन्य गतिविधियों के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं थी। इसलिए उन्होंने रविवार को अपनी पहचान न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी। मिलिट्री एयर ट्रैकिंग अलायंस जैसे विमानन गतिविधियों पर नजर रखने वाले समूहों ने ईरान युद्ध शुरू होने के शुरुआती दिनों से आरएएफ फेयरफोर्ड से दर्जनों बी-52 और बी-1 बमवर्षकों को उड़ान भरते देखा है। निगरानी करने वालों ने रविवार को कई बी-1 बमवर्षकों को इस एयरबेस से उड़ान भरते देखा। ट्रंप के सामने ईरान को लेकर क्या विकल्प यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इनमें नए हमले भी शामिल हैं। ट्रंप ने शुरुआत में अमेरिकी लोगों से कहा था कि यह अभियान कुछ हफ्तों तक चलेगा। व्हाइट हाउस से ओहायो में एक रैली के लिए रवाना होते समय ट्रंप ने शनिवार को पत्रकारों से कहा, ईरान को लेकर मेरे पास फैसले हैं, जो मैं करूंगा। ईरान तबाह हो चुका है। इसलिए एकमात्र सवाल यह है कि यह आसान तरीका होगा या मुश्किल तरीका। आतंकी साजिश के शक में कितने लोग पकड़े गए पिछले हफ्ते मध्य लंदन में दोहरी ब्रिटिश-ईरानी नागरिकता वाले एक व्यक्ति को आतंकी हमले की साजिश रचने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी सितंबर के अंत में आरएएफ फेयरफोर्ड में हुई एक सुरक्षा घटना के बाद हुई। जांच के दौरान कुल छह लोगों को हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।ब्रिटिश अधिकारियों ने इस घटना को तेहरान से जोड़ा है। ईरान ने इसमें शामिल होने से इनकार किया है। आरएएफ फेयरफोर्ड लंदन से करीब 100 मील यानी 160 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। मध्य पूर्व में दशकों से चले आ रहे संघर्षों के दौरान अमेरिका इस एयरबेस का इस्तेमाल अपने बमवर्षक विमानों के लिए करता रहा है। क्या पश्चिम एशिया में अमेरिका बढ़ा रहा है सैन्य मौजूदगी अमेरिकी सेना की पश्चिम एशिया में अभी भी बड़ी सैन्य मौजूदगी है। गुरुवार को अमेरिका के एक अधिकारी ने बताया कि हाल ही में तैनात किया गया यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट विमानवाहक पोत भी इस क्षेत्र की ओर जा रहा है। इसके साथ यूएसएस माल्किन आइलैंड उभयचर तैयार समूह भी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। यह कई जहाजों का एक समूह है। इनमें कुल 7,000 से अधिक नौसैनिक और 2,000 मरीन होते हैं। अधिकारी ने कहा कि इस कदम के बाद अक्तूबर के अंत तक इस क्षेत्र में तीन विमानवाहक पोत हो सकते हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 05, 2026, 02:40 IST
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