UP: अफसरों को 250 करोड़ की रिश्वत, रडार पर कई बड़े नाम; SIT जांच में खुलेंगे जीएसटी घोटाले के डिजिटल राज
हजारों करोड़ रुपये के कथित जीएसटी घोटाले के मास्टरमाइंड भगवान सिंह उर्फ भूरा प्रधान की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों ने उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जिन पर इस नेटवर्क को संरक्षण देने का आरोप है। विशेष जांच दल (एसआईटी) को आरोपी के कब्जे से मिले डिजिटल उपकरणों से ऐसे अहम साक्ष्य मिले हैं, जिनसे विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार, भूरा प्रधान ने लंबे समय तक जांच एजेंसियों से बचने के लिए तकनीकी तरीकों का सहारा लिया। वह लंदन के वर्चुअल नंबर का उपयोग करता था, जिससे उसकी वास्तविक लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था। इसके साथ ही, एन्क्रिप्टेड व्हाट्सएप चैट के जरिये वह अधिकारियों से संपर्क बनाए रखता था और निर्देश भी देता था। जांच में यह भी सामने आया है कि रिश्वत के लेनदेन के लिए कोडवर्ड्स का इस्तेमाल किया जाता था। एसआईटी को मिले डिजिटल साक्ष्यों से पता चला है कि करीब 250 करोड़ रुपये कथित तौर पर सुविधा शुल्क के रूप में विभिन्न अधिकारियों में बांटे गए। आरोपी के मोबाइल से प्रदेशभर के 20 से अधिक वरिष्ठ जीएसटी अधिकारियों के संपर्क नंबर और उनसे हुई बातचीत के रिकॉर्ड मिले हैं। इन चैट्स और कॉल डिटेल्स के आधार पर अब संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। छापे के दौरान करीब 535 फर्जी फर्मों से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनका कुल टर्नओवर 5473 करोड़ रुपये से अधिक दिखाया गया था। जांच में लगभग 989 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी और अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम के प्रमाण भी मिले हैं। अंतरराज्यीय स्तर पर फैला है नेटवर्क प्रारंभिक जांच से यह भी संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ था। कई जिलों की पहचान की गई है, जहां यह सिंडिकेट सक्रिय था और स्थानीय अधिकारियों से इसकी सीधी सांठगांठ थी। आरोपी मूल रूप से मथुरा जिले के हताना (कोसीकलां) का निवासी है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख संचालन केंद्र माना जा रहा है। अब विभागीय स्तर पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की तैयारी है। जिन अधिकारियों के नाम डिजिटल साक्ष्यों में सामने आए हैं, उनकी सूची का मिलान व्हाट्सएप चैट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से किया जा रहा है। इसमें ट्रक छुड़वाने के लिए प्रति ट्रक 20 से 30 हजार रुपये की दर तय होने की बात सामने आई है। पिछले दस वर्षों में कथित रूप से अवैध लाभ लेने वाले सभी लोगों की भूमिका की जांच कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 28, 2026, 04:50 IST
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