TMC Rift: बागी सांसद काकोली घोष बनीं NCPI की राष्ट्रीय अध्यक्ष, पार्टी संस्थापक को कैसे मिली विलय की जानकारी?
तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के गुट ने जिस नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में अपना विलय किया है काकोली घोष दस्तीदार 31 मई को ही उसकी नई राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गई थीं। पार्टी की ओर से सोमवार को बताया गया कि उसने विलय की जानकारी निर्वाचन आयोग को दे दी है। काकोली घोष के पार्टी अध्यक्ष चुने जाने की जानकारी भी आयोग को दे दी गई है। एनसीपीआई के सूत्रों ने बताया कि पार्टी की अध्यक्ष शिवली कुंडू ने 28 मई को प्राथमिक सदस्यता के साथ अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, एनसीपीआई की राजनीतिक मामलों की समिति ने काकोली को अध्यक्ष चुना। हावड़ा निवासी वकील शिवली कुंडू समेत तीन लोगों ने एनसीपीआई की शुरुआत की थी। शिवली ने कहा कि पार्टी बहुत बड़ी जगह जा रही है, यह सुनकर अच्छा लगा। एनसीपीआई संस्थापक को सोशल मीडिया से मिली विलय की जानकारी तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय के दावे के बीच पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संगठन सचिव शांतनु डे ने इस घटनाक्रम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी का विस्तार होता है तो उन्हें खुशी ही होगी और वह बागी सांसदों के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। शांतनु डे ने सोमवार को कहा कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों से मिली। उन्होंने बताया कि पार्टी अध्यक्ष ने इस संबंध में अभी उनसे कोई चर्चा नहीं की है, लेकिन यदि बागी सांसद संपर्क करते हैं तो वह उनसे बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा, हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हैं और राष्ट्रहित में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ काम करना चाहते हैं। डे ने कहा कि यदि काकोली घोष दस्तीदार बातचीत के लिए बुलाती हैं तो वह दिल्ली जाने को भी तैयार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्षों के बीच जल्द चर्चा होगी। काकोली ने लोस अध्यक्ष से की कल्याण के निष्कासन की मांग तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट का नेतृत्व कर रहीं सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी को सदन से निष्कासित करने की मांग की है। काकोली ने 10 जून को भेजे गए अपने पत्र में आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने कई अवसरों पर उनके और अन्य महिला सांसदों के खिलाफ अपमानजनक और स्त्री-विरोधी टिप्पणियां की हैं, जो संसदीय गरिमा के बिल्कुल प्रतिकूल है। उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी द्वारा व्यक्तिगत हमले, डराने-धमकाने की कोशिश व असम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल व्यक्तिगत उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना की श्रेणी में आता है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 16, 2026, 03:17 IST
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