Delhi NCR News: डेढ़ दशक की तीन आवाजें... अन्ना से ज्यादा निर्भया के करीब रहा सीजेपी आंदोलन

जंतर-मंतर पर हुए तीनों आंदोलनों की गूंज पूरे देश ने सुनी, सरकार भी रही सक्रियसीजेपी और निर्भया आंदोलन में लोगों की भागीदारी भी रही ज्यादा स्वैच्छिक, जबकि सिविल सोसायटी के बड़े चेहरों के साथ शुरू हुआ था अन्ना आंदोलनसंतोष कुमार नई दिल्ली। पिछले करीब डेढ़ दशक में जंतर मंतर पर खड़े हुए तीन बड़े जन आंदोलनों की गूंज पूरे देश में सुनी गई। वर्ष 2011 के अन्ना आंदोलन, 2012 के निर्भया आंदोलन और मौजूदा दौर के कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन ने अपने-अपने तरीके से समाज और सरकार पर गहरे तक असर डाला है। फिर भी, सांगठनिक तैयारी और जनभागीदारी के लिहाज से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन 2012 के दिल्ली की सामूहिक दुष्कर्म की घटना से पैदा हुए जनाक्रोश से निकले निर्भया आंदोलन से ज्यादा नजदीक है। दोनों आंदोलन अचानक हुए और अपने तात्कालिक लक्ष्य को हासिल करने में कामयाब भी रहे। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि परीक्षाओं के पेपर लीक होने से देश का युवा महीनों से नाराज चल रहा था। लेकिन इसको जाहिर करने का उसके पास कोई तरीका नहीं था। नीट परीक्षा का पेपर लीक आंदोलन का ट्रिगर पॉइंट बना। इसने अपने भविष्य को लेकर फिक्रमंद रहने वाले युवाओं को अचानक सड़क पर ला दिया। शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़े इस आंदोलन से सहानुभूति इनके परिवार से भी मिली। कुछ-कुछ उसी तरह से, जैसे मानवता को शर्मसार करने वाली दिल्ली की 2012 की दुष्कर्म की घटना से निकले निर्भया आंदोलन के साथ हर परिवार अपने को कनेक्ट पा रहा है। उस दौरान सबकी फिक्र अपनी बच्चियों की सुरक्षा को लेकर थी। दोनों आंदोलनों में बेशक कोई स्पष्ट सांगठनिक ढांचा नहीं रहा हो, लेकिन जनभागीदारी बड़ी और देशव्यापी रही। इसके उलट अन्ना आंदोलन पूरी तरह से राजनीतिक था। इसके केंद्र में राजनीति और शासन से भ्रष्टाचार मिटाने के लिए जन लोकपाल कानून बनवाना था। आंदोलन का सांगठनिक ढांचा स्पष्ट था और आंदोलन के चेहरे भी बड़े थे। इसके लिए महीनों से बड़े पैमाने पर तैयारी भी गई थी। कानून बनवाने के लिए सिविल सोसाइटी ने लगातार सरकार के साथ संवाद भी किए। लोगों ने इसमें भी हिस्सा लिया, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव सीजेपी और निर्भया आंदोलन सरीखा नहीं था।विशेषज्ञों की राय: तीनों आंदोलनों की प्रकृति अलग थी, लेकिन निर्भया और सीजेपी के आंदोलन में भावनात्मक जुड़ाव ज्यादा था। तीनों आंदोलनों ने अपने-अपने तरीके से समाज और राजनीति पर असर डाला है। सीजेपी आंदोलन से वह युवा जुड़ा है, जो स्वप्नदर्शी होने के साथ बेहतर भविष्य की तलाश में रहता है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और कानूनी सुरक्षा मिलने से शिक्षा व्यवस्था किस तरह बदलेगी, यह देखने वाली बात होगी।- प्रोफेसर चंद्रचूड़ सिंह, राजनीति विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय----चुनावी तौर पर ज्यादा प्रभावी न रहने वाली शिक्षा व्यवस्था इस आंदोलन से केंद्र में आ गई। जबकि निर्भया आंदोलन लैंगिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ा था। वहीं, अन्ना आंदोलन ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना दिखाया था। तीनों आंदोलनों में तुलनात्मक रूप से निर्भया और सीजेपी का आंदोलन ज्यादा करीब है। जनभागीदारी के लिहाज से दोनों स्वतः स्फूर्त रहे हैं, जबकि इनका सांगठनिक ढांचा स्पष्ट व मजबूत नहीं था। -प्रोफेसर राजेश झा, प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय----अन्ना आंदोलन और निर्भया आंदोलन व्यवस्थागत बदलाव को लेकर थे। दोनों आंदोलनों के बाद 2014 में आम लोगों ने वोट के माध्यम से अपनी नाराजगी का इजहार भी किया। जबकि सीजेपी का आंदोलन नकारात्मक एजेंडे के साथ शुरू हुआ। इस आंदोलन के नारों, मंच पर पहुंच रहे बड़े चेहरों, आंदोलन के दौरान की हिंसा जैसी चीजों ने इसके भीतर के अंतर्विरोध को भी उजागर किया है।-डॉ. अमित सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, राष्ट्रीय सुरक्षा विशिष्ट अध्ययन केंद्र, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय-----अन्ना आंदोलन: भ्रष्टाचार के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी लहर मुख्य मांगें: भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत लोकपाल विधेयक। नेतृत्व: अन्ना हजारे और उनके सहयोगी। स्वरूप: बड़े पैमाने पर जनभागीदारी, अनशन, रैलियां। प्रभाव: इसने देश में भ्रष्टाचार के मुद्दे को केंद्र में ला दिया।-----निर्भया आंदोलन: महिला सुरक्षा के लिए एक मार्मिक पुकार 2012 में दिल्ली में हुए एक सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद निर्भया आंदोलन भड़का। मुख्य मांगें: महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकना, कड़ी सजा, पुलिस सुधार और महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल। नेतृत्व: विभिन्न नागरिक सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की ओर से संचालित, विशेष रूप से युवा वर्ग की भागीदारी। स्वरूप: जंतर-मंतर पर भारी भीड़, मशाल जुलूस, और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन। प्रभाव: इस आंदोलन ने देश में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर बहस छेड़ी और कुछ हद तक कानून में बदलाव भी किया।----कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन: एक व्यंग्यात्मक विरोध मुख्य मांगें: नीट परीक्षा को पेपर लीक होने पर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा। नेतृत्व: कॉकरोच जनता पार्टी के साथ कई अनौपचारिक और व्यंग्यात्मक समूह। जेन जी समेत युवा वर्ग की भागीदारी। स्वरूप: जंतर मंतर पर जबरदस्त विरोध, हास्य-व्यंग्य और सोशल मीडिया का उपयोग। प्रभाव: केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 25, 2026, 20:11 IST
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