Hardoi News: ऑक्सीजन प्लांट है, बेड तक लाइन भी... फिर भी कंसंट्रेटर के भरोसे मरीज

हरदोई। मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए ऑक्सीजन प्लांट लगा है लेकिन वार्ड के सभी मरीजों के बेडों तक लाइन ही नहीं बिछी है। 60 बेडों की इमरजेंसी में रेड और यलो जोन के करीब 25 बेडों तक लाइन बिछी है लेकिन ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है। मरीजों की सांस ऊपर नीचे होने पर कंसंट्रेटर और सिलिंडरों का सहारा लेना पड़ता है।जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी इकाई मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार अभी तक नहीं हो पाया है। मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के चार प्लांट लगे हैं इसके बाद भी मरीजों काे ऑक्सीजन के लिए कंसंट्रेटर और सिलिंडर पर निर्भर होना पड़ता है। ऑक्सीजन की सप्लाई नियमित रूप से न तो इमरजेंसी में हो पाती है और न ही आईसीयू में। बता दें कि कोविड काल में ऑक्सीजन की कमी पड़ने पर अस्पताल में भी प्रधानमंत्री केयर फंड और जन सहयोग से ऑक्सीजन प्लांटों की स्थापना करवाई गई थी। इमरजेंसी के लिए भी अलग से ऑक्सीजन प्लांट लगा हुआ है लेकिन रेड जोन के 10 बेड और येलो के करीब 15 बेडों के अलावा कहीं पर भी ऑक्सीजन की लाइन तक नहीं बिछी है। ग्रीन जोन को छोड़ दें तो ट्राएज एरिया के 15 बेडों पर भी ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं होती है।500 लीटर प्रति मिनट का प्लांट महज दिखावामेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी गेट के पास बना 500 लीटर प्रति मिनट क्षमता ऑक्सीजन उत्पादन करने का प्लांट सिर्फ शोपीस बना हुआ है। प्लांट संचालित हो रहा है इसके बाद भी इमरजेंसी के ट्राएज एरिया में ऑक्सीजन कर सप्लाई करने के लिए पाइप ही नहीं डाले गए हैं। रेड जोन और यलो जोन में भी तकनीकी खराबी से आए दिन ऑक्सीजन बाधित रहती है।पीकू और आईसीयू वार्ड में भी बाधित रहती सप्लाई बच्चों के 42 बेडों का पीकू वार्ड और 10 बेडों की आईसीयू में भले ही ऑक्सीजन की पाइप लाइन बिछी हुई है लेकिन वहां भी सप्लाई बाधित बनी रहती है। ऐसे में आईसीयू में भर्ती मरीजों को भी सिलिंडर और कंसंट्रेटर के भरोसे ही रहना पड़ता है। हर 10 दिन में रिफिल कराए जा रहे सिलिंडर मेडिकल कॉलेज में संयंत्रों के चलने के बावजूद हर 10 दिनों में सिलिंडरों की रिफिलिंग निजी क्षेत्र से करवाई जा रही है। जानकारी के अनुसार अभी तक मई में ही एक बार 20, एक बार 37 और एक बार 29 सिलिंडरों की रिफिलिंग कराई गई। इस प्रकार माह में करीब 86 सिलिंडर रिफिल कराए गए। एक सिलिंडर पर करीब 400 से 500 रुपये खर्च आ रहा है। स्पष्ट है कि हर माह करीब 35 से 40 हजार रुपये तो रिफिलिंग पर खर्च किए जा रहे हैं।प्लांट चल रहा है और ऑक्सीजन की सप्लाई भी हो रही है। ट्राएज एरिया में भी पाइप लाइन बिछाने के लिए प्रस्ताव बना हुआ है। जल्दी ही इस पर काम शुरू करवाया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य फोटो-20- मेडिकल कॉलेज स्थित ऑक्सीजन प्लांट। संवाद फोटो-20- मेडिकल कॉलेज स्थित ऑक्सीजन प्लांट। संवाद

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 02, 2026, 23:06 IST
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