Mandi News: नगर निगम अब घंटाघर की स्वयं करवाएगा मरम्मत
मंडी। जिला मुख्यालय की इंदिरा मार्केट के बीचोंबीच स्थित घंटाघर की घड़ियों की मरम्मत के लिए अब नगर निगम को न तो कोलकाता से कारीगर बुलाने पड़ेंगे न ही किसी स्थानीय कारीगर से घड़ियों की मरम्मत करवाना पड़ेगी। नगर निगम के कर्मचारी अब घंटाघर की इन घड़ियों की स्वयं मरम्मत कर सकेंगे। शहर के एक कारीगर ने इसके लिए निगम के कर्मचारी को प्रशिक्षण प्रदान कर दक्ष बना दिया है। घंटाघर को टावर क्लॉक के नाम से भी जाना जाता है। घंटाघर में चारों दिशाओं की तरफ बड़े आकार की घड़ियां स्थापित हैं। ये घड़ियां ब्रिटिश काल के साथ साथ रियासत काल की यादों को आज भी ताजा कर रही हैं।28 फरवरी 1939 को मंडी रियासत के तत्कालीन राजा जोगेंद्र सेन की मौजूदगी में स्टेटस फोर्सेज मिलिटरी एडवाइजर इन चीफ सर ऑर्थर एम मिल्ज ने इसका शुभारंभ किया था। जहां पर घंटाघर का निर्माण किया गया है, इस स्थल का इतिहास 300 वर्ष से अधिक पुराना है। इतिहासकारों का मानना है कि 1701 ईस्वी में मंडी और पड़ोसी रियासत भंगाल के बीच दुश्मनी चरम पर थी। हालांकि दोनों रियासतों में पूर्व में अच्छे संबंध थे लेकिन किन्हीं कारणों से राजा सिद्ध सेन के कार्यकाल में दोनों रियासतों में दुश्मनी की खाई काफी बढ़ गई थी। भंगाल के राजा पृथी पाल भंगालिया को मंडी रियासत के तत्कालीन राजा सिद्ध सेन ने बंदी बनाकर उसका सिर कलम कर दिया। बताया जाता है कि दुश्मन राजा के सिर को राजा ने इसी स्थल पर दफन किया था।ऐतिहासिक घंटाघर की घड़ियों की मरम्मत कर दी गई है। स्थानीय निवासी सन्नी ने नगर निगम के एक कर्मचारी को मरम्मत कार्य का प्रशिक्षण दिया है। अब नगर निगम स्वयं घंटाघर की घड़ियों का मरम्मत करेगा।-रोहित राठौर, आयुक्त, नगर निगम मंडी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 04, 2026, 23:15 IST
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