Bareilly News: बांस-बेंत के उत्पादों से चमक रहा शहर का नाम
बरेली। शहर के बांस और बेंत से बने उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं। जिलेभर में इस कारोबार का सालाना दायरा करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। इस कारोबार से पांच हजार से अधिक कारीगर जुड़े है। शहर के कारीगरों की कला से फर्नीचर और अन्य वस्तुएं तैयार होती हैं। कुमार टॉकीज रोड पर स्थित बाजार में सोफा सेट, डाइनिंग टेबल, झूले और बच्चों के पालने जैसे उत्पाद मिलते हैं। कारोबारी मुज्जकिर हुसैन के अनुसार, यह माल उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में भेजा जाता है। बरेली की यह पारंपरिक कारीगरी अब देश के बड़े व्यावसायिक बाजारों का अहम हिस्सा है। उच्च गुणवत्ता का फर्नीचर बनाने के लिए बांस मुख्य रूप से असम और त्रिपुरा से आयात किया जाता है। स्थानीय बांस से केवल सीढ़ी और बल्लियां ही बनती हैं। राष्ट्रीय बैंबू मिशन के तहत नवाबगंज और फतेहगंज पश्चिमी के पास किसानों ने बांस की खेती शुरू की है। अगले दो वर्षों में शहर को यहीं से अच्छा बांस मिलने की उम्मीद है।कारोबारी सैफ के अनुसार, बांस-बेंत के फर्नीचर बीते चार वर्षों से यूरोप, फिलीपींस और डेनमार्क को निर्यात किए जा रहे हैं। बरेली में इस कारोबार का इतिहास कई दशकों पुराना है। पिछले सात वर्षों से कारीगर विदेशों की मांग पर पालतू जानवरों के लिए विशेष बिस्तर, भोजन पात्र और स्नान पात्र भी बना रहे हैं। बांस-बेंत के आभूषण भी बाजार में उपलब्ध हैं। इनमें कान की बालियां, हार, चेन और चाबी के छल्ले शामिल हैं।सरकारी प्रयासों और हैंडीक्राफ्ट मेलों ने बरेली के हस्तशिल्प को नई पहचान दी है। शासन द्वारा आयोजित मेलों में उद्यमी हिस्सा लेते हैं। इन मेलों में उत्पाद बिकने के साथ बड़े खरीदार भी मिलते हैं। राष्ट्रीय बैंबू मिशन के तहत घरेलू महिलाएं प्रशिक्षण लेकर कलात्मक उत्पाद तैयार कर रही हैं। निर्यातक इन उत्पादों को खरीदकर विदेश भेजते हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Sep 18, 2026, 01:25 IST
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