Teejan bai : तीजन बाई ने कहा था- पंडवानी पर और लिखिए, इस कला को आगे ले जाइए
उस किताब को और आगे बढ़ाइएआपके पास तो मेरे कई साक्षात्कार हैं। पंडवानी पर और लिखिए, इस कला को आगे ले जाइए। तीजन बाई पर प्रकाशित पहली पुस्तक के लेखक डॉ.धनंजय चोपड़ा के पास पद्म विभूषण तीजन के जीवन के आखिरी पलों की यही स्मृतियां शेष रह गईं।वरिष्ठ साहित्यकार और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज के कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ.धनंजय चोपड़ा बताते हैं कि मंच पर आत्मविश्वास से भरीं तीजन बाई का जीवन आसान नहीं था। जब उन्होंने पंडवानी गाना शुरू किया, तब महिलाओं का इस लोकगायन से जुड़ना वर्जित माना जाता था। उन्होंने परिवार से छिपकर यह कला सीखी। मंच तक पहुंचने के लिए सामाजिक विरोध झेला। वैवाहिक जीवन में भी संघर्ष कम नहीं थे। आर्थिक तंगी, नौकरी की परेशानियां और निजी जीवन की कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पंडवानी का साथ कभी नहीं छोड़ा। डॉ.चोपड़ा बताते हैं कि 1996 में पहली बार उनकी मुलाकात तीजन बाई से हुई थी। इसके बाद कई मुलाकातें और लंबे साक्षात्कार स्मृतियों का हिस्सा बने। 2002 में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र ने तीजन पर मोनोग्राफ लिखने की जिम्मेदारी सौंपी। यह तीजन बाई पर प्रकाशित पहली पुस्तक बनी। इसके लिए उन्हें बार-बार तीजन बाई के पास जाना पड़ा। हर मुलाकात में कोई नया प्रसंग, नई कथा और महाभारत का कोई नया पात्र उनके सामने जीवंत हो उठता। तीजन कभी लिखी स्क्रिप्ट से नहीं गाती थीं। महाभारत की कथा के बीच समाज, स्त्री, संघर्ष और जीवन के सवालों को भी पिरोती चलती थीं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 06, 2026, 14:09 IST
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