Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का अदालतों को निर्देश- वकील का खर्च नहीं उठा सकता आरोपी तो दें कानूनी सहायता

सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों को निर्देश दिया कि यदि आरोपी वकील का खर्च नहीं उठा सकता है तो वे ट्रायल शुरू होने से पहले उन्हें कानूनी सहायता देने की पेशकश करें और उनका जवाब रिकॉर्ड करें। शीर्ष अदालत ने यह निर्देश यह सुनिश्चित करने के लिए दिया कि आपराधिक मामलों में जिन आरोपियों के पास वकील करने के पैसे नहीं हैं, उन्हें भी वकील मिले। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) कानून के तहत दर्ज एक मामले में रेजिनामरी चेल्लामणि की लंबी कैद पर ध्यान देते हुए ट्रायल कोर्ट को अपने आदेश का सख्ती से पालन करने को कहा।चेल्लामणि को जमानत देते हुए पीठ ने कहा कि उन्होंने शुरुआती चरण पर गवाहों से जिरह नहीं की थी और यह तभी हुआ जब उन्होंने अपना वकील किया तथा गवाहों से दोबारा पूछताछ करने की उनकी अर्जी स्वीकार हुई। इसके बाद ही उन्हें ऐसा करने की इजाजत मिली। ये भी पढ़ें:Supreme Court:'डीए कर्मचारियों का हक है', बंगाल सरकार को 'सुप्रीम' आदेश; देना होगा 2008-19 तक का महंगाई भत्ता चार साल से ज्यादा समय से जेल में थी आरोपी पीठ ने कहा कि आरोपी रेजिनामरी चेल्लामणि के पास से कथित तौर पर जब्त किए गए गैर-कानूनी पदार्थ की मात्रा बताए गए कानून के तहत उस संबंध में तय की गई कमर्शियल मात्रा से ज्यादा है। हालांकि, हमने पाया कि अपीलकर्ता रेजिनामरी चेल्लामणि आज की तारीख तक चार साल एक महीने और 28 दिनों से हिरासत में हैं।पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता ने जितनी जेल की सजा पहले ही काट ली है, उन्हीं की तरह की स्थिति वाले एक और आरोपी को इस कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। इसलिए हम इस चरण पर अपीलकर्ता चेल्लामणि को भी वही राहत देने के इच्छुक हैं। ये भी पढ़ें:RAC:'पूरे किराये में आधी सीट सही नहीं', संसदीय समिति ने की आरएसी यात्रियों को आंशिक किराया लौटाने की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट ने दिए क्या निर्देश आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाली ट्रायल अदालतों की यह जिम्मेदारी है कि ऐसी स्थितियों का सामना करने पर वे आरोपी को कानूनी प्रतिनिधित्व के उनके अधिकार और अगर वे वकील का खर्च नहीं उठा सकते हैं तो कानूनी सहायता वकील की ओर से प्रतिनिधित्व पाने के हक के बारे में बताएं। गवाहों की जांच शुरू करने से पहले ट्रायल कोर्ट इस संबंध में आरोपी को दिए गए प्रस्ताव, उस प्रस्ताव पर आरोपी के जवाब और उसके बाद की गई कार्रवाई को अपने आदेशों में रिकॉर्ड करेंगे। इस प्रक्रिया को सावधानी से अपनाया जाना चाहिए और अमल में लाया जाना चाहिए। यह आदेश सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को भेजा जाए ताकि वे इस संबंध में सभी संबंधित ट्रायल कोर्ट को उचित निर्देश जारी कर सकें। अन्य वीडियो

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 06, 2026, 04:09 IST
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