व्हाट्सएप को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, भरोसे से पहले पारदर्शिता की असली परीक्षा; जवाबदेही से बच नहीं सकता
व्हाट्सएप को क्या भारत छोड़ना पड़ेगा और यदि ऐसा हुआ, तो बिन व्हाट्सएप जीवन कैसा होगा परिवार के लोगों से वीडियो कॉल से लेकर ऑफिस ग्रुप तक, आप चाहें भी तो व्हाट्सएप नहीं छोड़ सकते। इसने जीवन सरल तो बनाया ही है। शायद इसीलिए बहुत तेजी से यह पूरे विश्व का सबसे बड़ा मैसेंजर बनकर उभरा। लेकिन फेसबुक की कंपनी मेटा द्वारा खरीद लिए जाने के बाद से यही व्हाट्सएप अब शक के घेरे में है। आइए, पूरा इतिहास जानते हैं। वह साल था 2009। जैन कौम और ब्रायन एक्टन नाम के दो याहू कर्मचारियों ने एक मैसेजिंग सर्विस के रूप में व्हाट्सएप की परिकल्पना की। फोन में इंटरनेट आ जाने की वजह से साल भर में ही व्हाट्सएप लोगों के फोन में आने लगा। चूंकि एसएमएस के लिए पैसे लगते थे, तो लोगों ने संदेश व्हाट्सएप पर भेजना शुरू किया। कंपनी के लॉन्च के पांच साल के अंदर फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग की नजर व्हाट्सएप पर पड़ी। उन्होंने 21.8 अरब डॉलर में व्हाट्सएप खरीद लिया। उनकी कंपनी ने वादा किया कि लोगों की निजता सर्वोपरि होगी। व्हाट्सएप के संस्थापक भी फेसबुक से संतुष्ट ही दिखे, क्योंकि विलय के बाद भी वह व्हाट्सएप से जुड़े रहे, लेकिन 2018 में मोनेटाइजेशन एवं डाटा प्राइवेसी पर चिंता व्यक्त करते हुए एक संस्थापक अपनी ही कंपनी में से निकल गए। सोचिए जरा, जब फेसबुक ने 21.8 अरब डॉलर में व्हाट्सएप खरीदा, तो खैरात के लिए तो नहीं ही खरीदा होगा। व्हाट्सएप फेसबुक के लिए एक व्यवसाय था। और यह व्यवसाय था डाटा का। चूंकि इसे हर कोई अपने फोन में इस्तेमाल करता है, तो फेसबुक ने इतनी जानकारी के चलते इसे पैसे कमाने की मशीन समझ लिया और अपने वादे से पलट गया। उसने वादा किया था कि व्हाट्सएप पर लोगों की जानकारी लोगों तक ही सीमित रहेगी। लेकिन 2021 में फेसबुक ने अपनी पॉलिसी बदल दी। कोविड के दौर में लोग व्हाट्सएप पर और निर्भर हुए। बदली हुई पॉलिसी के मुताबिक, व्हाट्सएप इजाजत मांग रहा था कि आपकी कुछ जानकारी फेसबुक और कंपनी के अन्य भाग के साथ साझा की जाए। इसका मकसद विज्ञापन से पैसा कमाना था। फिर क्या था, भारत समेत दुनिया भर में हंगामा मच गया। हिंदुस्तान में खास तौर से यह बात कही जाने लगी कि व्हाट्सएप ने अपने एकाधिकार का दुरुपयोग किया है। 2021 में आए शुरुआती मैसेज में व्हाट्सएप ने कहा, या तो पॉलिसी मानो, नहीं तो एक निर्धारित तारीख के बाद अकाउंट नहीं चलेगा। लोगों को लगा कि यह उनकी निजता पर हमला है और यह मजबूरी का फायदा उठाना है। हंगामा हुआ तो व्हाट्सएप यह बताने पर मजबूर हुआ कि सिर्फ कुछ सतही जानकारी ही साझा करेंगे। आपके मैसेज के अंदर हम नहीं घुस रहे। यहां तक कि मैसेज एंड-टू-एंड एंक्रिप्टेड हैं। मतलब व्हाट्सएप अगर चाहे भी, तो उसे नहीं पढ़ सकता। दबाव में आकर व्हाट्सएप ने शर्त मानने की तारीख हटा दी, पर लगातार लोगों को नोटिफिकेशन भेज कर याद दिलाता रहा। इस बीच यह मामला भारत की कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) में चला गया। सीसीआई की जांच 2021 में शुरू हुई और नवंबर 2024 में आदेश आया। सीसीआई ने माना कि व्हाट्सएप और फेसबुक (मेटा) अपने पद का दुरुपयोग कर रहा था। उसने 213 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया। एक महीने बाद व्हाट्सएप एनसीएलएटी में अपील लेकर गया। नवंबर 2025 में मेटा-व्हाट्सएप को कुछ मामलों में राहत तो मिली, लेकिन जुर्माना भरने के लिए अब भी कहा गया। जनवरी 2026 में व्हाट्सएप ने इस उम्मीद से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया कि राहत मिलेगी। लेकिन कोर्ट ने सीधे कहा-देश का कानून नहीं मान सकते, तो भारत छोड़ दीजिए। दरअसल, सारा मामला दावे का है। व्हाट्सएप का दावा है कि वह आपका-मेरा निजी डाटा किसी से साझा नहीं करता। लेकिन कोर्ट में जिरह कर रहे लोगों का कहना है कि दुनिया भर से प्रमाण है कि मेटा-व्हाट्सएप डाटा का इस्तेमाल अपने मुनाफे के लिए करता है। सबसे बड़ी समस्या यहां पारदर्शिता की कमी की है। व्हाट्सएप का निजता संरक्षण का दावा तब तक दावा ही रहेगा, जब तक कि प्रमाणित न हो जाए कि वह सच बोल रहा है। खास तौर से तब, जब भारत में दो एजेंसियों ने उसे दोषी पाया और दंडित किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो मामले और हैं। वियना यूनिवर्सिटी में हुई एक रिसर्च के मुताबिक, व्हाट्सएप के 3.5 अरब उपभोगता हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 75 करोड़ भारत में हैं। इस रिसर्च ने यह पाया है कि व्हाट्सएप पर तस्वीर, स्टेटस और अबाउट सेक्शन लीक हो सकता है, क्योंकि कंटेंट डिस्कवरी फीचर में समस्या है। व्हाट्सएप के लिए सबसे बड़ी मुसीबत अमेरिका में ही आई। सेन फ्रांसिस्को की एक अदालत में एक मुकदमा चल रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि व्हाट्सएप के कर्मचारियों के पास अरबों व्हाट्सएप ग्राहकों की निजी बातचीत का डाटा है। जी हां, वही जानकारी, जिसके लिए व्हाट्सएप कहता है कि यह एंड-टू-एंड एंक्रिप्टेड है। इसका मतलब यह हुआ कि व्हाट्सएप का यह दावा कि -आपकी तरफ से दिया संदेश और दूसरी तरफ प्राप्त संदेश सिर्फ आप ही पढ़ सकते हैं-गलत हो सकता है। कोर्ट में जिरह कर रहे लोगों का कहना है व्हाट्सएप कंपनी के पास इतना ऑनलाइन स्पेस है कि वह सबका निजी डाटा स्टोर कर सकती है और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि व्हाट्सएप ने इसे निराधार बताया है। बात घूम-फिर कर वहीं आती है। जब तक व्हाट्सएप पूरी पारदर्शिता के साथ लोगों को आश्वस्त नहीं कर देता कि वह लोगों का डाटा इस्तेमाल नहीं करता, तब तक यह कैसे मान लिया जाए कि वह सच बोल रहा है ऐसे में यदि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भी व्हाट्सएप अपनी हरकतों से बाज नहीं आता, तो क्या हम वाकई व्हाट्सएप मुक्त भारत हो जाएंगे सवाल यहां विकल्प का भी है। यह एप इतना बड़ा हो गया है कि इसके टक्कर में और कोई है ही नहीं। व्हाट्सएप अगर तीन अरब से अधिक लोगों के पास है, तो टेलीग्राम एक अरब और सिग्नल सिर्फ 10 करोड़ लोगों के पास। भारत सरकार खुद अपने सरकारी संवाद के लिए व्हाट्सएप जैसा एक मैसेंजर लाना चाहती थी, लेकिन आम जनमानस तक इसे उतारा नहीं गया है। ऐसे में आप और हम एक बड़े तकनीकी दिग्गज की मनमर्जी के गुलाम न बन जाएं, इसके लिए पारदर्शिता की मांग ही सबसे सही राह है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 06, 2026, 03:31 IST
व्हाट्सएप को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, भरोसे से पहले पारदर्शिता की असली परीक्षा; जवाबदेही से बच नहीं सकता #Opinion #National #Whatsapp #DataPrivacy #Transparency #India #SupremeCourt #Meta #Controversy #DigitalPrivacy #UserDataProtection #SocialMediaRegulation #SubahSamachar
