ब्याज दरें बढ़ने के बीच स्पेशल एफडी कितनी फायदेमंद?: पांच लाख पर कितना लाभ; टैक्स के बाद क्या बचेगा?
कानपुर में रहने वाले रमेश जब पिछले साल रिटायर हुए तो एकमुश्त बड़ी रकम हाथ आई। सुरक्षित और अच्छे रिटर्न के लिए सारा पैसा बैंक की 444 दिन वाली स्पेशल एफडी में लगा दिया। उन्हें लगा कि उन्होंने सबसे समझदारी का काम किया है। लेकिन अब जब आरबीआई ने 4 साल बाद न केवल ब्याज दर बढ़ाई है, बल्कि आगे भी और बढ़ोतरी का संकेत दिया है। तब रमेश अपने फैसले पर पछता रहे हैं। जब ब्याज दरें अभी और ऊपर जाने के रास्ते पर हैं, तब किसी स्पेशल एफडी में एक निश्चित अवधि के लिए पैसा बांध देना समझदारी नहीं है। नाममात्र का फायदा और टैक्स का बड़ा फंदा एसबीआई की 444 दिन की स्पेशल एफडी पर 6.45% ब्याज मिलता है, जबकि उसी अवधि की रेगुलर एफडी पर ब्याज दर 6.25% है। यानी अंतर सिर्फ 20 आधार अंकों का है। 5 लाख रुपये के निवेश पर टैक्स से पहले अतिरिक्त ब्याज केवल 1,293 रुपये बैठता है। यदि आप 30% के टैक्स स्लैब में आते हैं, तो यह अतिरिक्त रिटर्न घटकर मात्र 905 रुपये रह जाता है। इतने से मामूली फायदे के लिए अपने पैसों कोलंबी अवधि के लिए फंसा देना क्या वाकई अक्लमंदी है आपातकाल में एफडी तोड़ी तो और बड़ा झटका स्पेशल एफडी की सबसे बड़ी कमजोरी उसका कम लचीलापन है। अगर आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ गई और आपने मैच्योरिटी से पहले एफडी तोड़ दी, तो बैंक न सिर्फ स्पेशल ब्याज दरें छीन लेता है, बल्कि कम अवधि की दर पर ब्याज देने के साथ-साथ पेनल्टी भी काटता है। कई बार तो समय से पहले तोड़ने पर आप रेगुलर एफडी से भी कम रिटर्न हाथ में लेकर लौटते हैं। क्या है एफडी में निवेश का रास्ता मौजूदा बढ़ती ब्याज दरों के माहौल में सबसे अचूक नुस्खा एफडी लैडरिंग का है। सारा पैसा एक साथ एक जगह फंसाने के बजाय, उसे अलग-अलग अवधियों की कई छोटी एफडी में बांट दें। इससे आपके पास समय-समय पर नकदी भी बनी रहेगी और जैसे-जैसे बाजार में ब्याज दरें बढ़ेंगी, आप उन नई और ऊंची दरों पर अपने पैसों को दोबारा निवेश कर सकेंगे। ये भी पढ़ें:अब विदेशों से कम दालें मंगा रहा भारत: आयात 31% घटा और निर्यात भी बढ़ा; आखिर कैसे बदली तस्वीर लॉन्ग-टर्म पोर्टफोलियो में स्पेशल एफडी कितनी उपयोगी एक स्पेशल एफडी तब उपयोगी होती है, जब उसकी मैच्योरिटी की तारीख ठीक उस समय से मेल खाती हो जब आपको पता हो कि आपको पैसों की जरूरत होगी। यह आपके कुल निवेश को सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि, केवल सबसे ऊंची दर के पीछे भागने के लिए बार-बार बैंक बदलना समझदारी नहीं है। इससे समय से पहले निकासी पर पेनल्टी लगती है और खराब प्लानिंग होती है। केवल ब्याज दर न देखें, हमेशा बैंक की सुरक्षा और मजबूती को परखें। स्पेशल एफडी बनाम रेगुलर एफडी पैरामीटर स्पेशल-टेन्योर एफडी रेगुलर एफडी अवधि निश्चित और असामान्य अवधि, जैसे 444 या 555 दिन लचीली अवधि, आमतौर पर 7 दिन से 10 साल ब्याज दर आमतौर पर बैंक की रेगुलर दर से थोड़ा प्रीमियम चुने गए टेन्योर के अनुसार मानक दर लागू SBI का उदाहरण 444 दिन की अमृत वृष्टि: 6.45% 1 से 2 साल की एफडी: 6.25% दर में प्रीमियम एसबीआई के उदाहरण में 20 आधार अंक — 5 लाख रुपये पर ब्याज 444 दिनों के लिए लगभग 40,472 रुपये लगभग समान अवधि के लिए 39,179 रुपये अतिरिक्त ब्याज (टैक्स से पहले) लगभग 1,293 रुपये — 30% टैक्स के बाद अतिरिक्त रिटर्न लगभग 905 रुपये — समय से पहले निकासी स्पेशल रेट खत्म हो सकती है; कम लागू दर और पेनल्टी लागू हो सकती है कम लागू दर और पेनल्टी लागू हो सकती है किसके लिए उपयुक्त जिनके पास ऐसा पैसा है, जिसे मैच्योरिटी तक बिना छुए रखा जा सकता है वे निवेशक जो निवेश की अवधि चुनने में अधिक लचीलापन चाहते हैं एफडी के लिए टाइमिंग महत्वपूर्ण हाल ही में हुई आरबीआई की दरों में बढ़ोतरी ने टाइमिंग को महत्वपूर्ण बना दिया है, लेकिन आपको आंख मूंदकर सबसे ऊंची दर के पीछे नहीं भागना चाहिए और न ही अनंत काल तक इंतजार करना चाहिए। अपने निवेश को फैलाएं, कुछ नकदी हाथ में रखें, और एक ऐसी एफडी चुनें, जो आपके जीवन के लक्ष्यों के अनुकूल हो। सही सवाल यह नहीं है कि कौन-सी एफडी सबसे ज्यादा भुगतान करती है, बल्कि यह है कि कौन-सी एफडी मेरी जरूरतों पर बिल्कुल सटीक बैठती है - आदिल शेट्टी, सीईओ, बैंकबाजार स्पेशल एफडी की ब्याज दर बैंक का नाम ब्याज दर एसबीआई 6.45% केनरा बैंक 6.60% पीएनबी 6.60% एचडीएफसी बैंक 6.45% आईसीआईसीआई बैंक 6.30% सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक 7.80% उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.10% स्रोत: संबंधित बैंकों की वेबसाइटों पर 2 अक्तूबर, 2026 के अनुसार। निवेश करने से पहले क्या जांचना चाहिए सबसे पहले, जांचें कि क्या समय अवधि उस समय से मेल खाती है, जब आपको नकदी की आवश्यकता है। उसी अवधि की रेगुलर एफडी के साथ ब्याज दर की तुलना करें। समय से पहले निकासी, पेनल्टी व ऑटो-रिन्यूअल के नियम पढ़ें। अपने पोस्ट-टैक्स (टैक्स कटौती के बाद) रिटर्न को ध्यान में रखें।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 12, 2026, 03:27 IST
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