SDG-7 की रिपोर्ट में खुलासा: दुनिया के 65.5 करोड़ लोग अब भी बिजली से वंचित, दो अरब प्रदूषित ईंधन के सहारे
दुनिया में स्वच्छ, सस्ती और सुलभ ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रगति जारी है, लेकिन 2030 तक सतत विकास लक्ष्य-7 (एसडीजी-7) हासिल करना मुश्किल दिखाई दे रहा है। विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा, अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा, संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा संयुक्त रूप से जारी ट्रैकिंग एसडीजी 7: दि एनर्जी प्रोग्रेस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में आज भी करीब 65.5 करोड़ लोग बिजली से वंचित हैं, जबकि लगभग 200 करोड़ लोग लकड़ी, कोयला, मिट्टी का तेल और गोबर जैसे प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों से खाना पकाने को मजबूर हैं। रिपोर्ट बताती है कि बिजली और स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच में सबसे बड़ी चुनौती उप-सहारा अफ्रीका में है। इस क्षेत्र में 56 करोड़ से अधिक लोग आज भी बिजली के बिना जीवन बिता रहे हैं, जबकि करीब 97 करोड़ लोगों के पास स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और अधिक चिंताजनक है, जहां बिजली पहुंचाने की रफ्तार लगातार धीमी हुई है। विश्व की 92 फीसदी आबादी तक बिजली पहुंचीरफ्तार कम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी गति से काम चलता रहा तो ऊर्जा असमानता और गहरी हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की लगभग 92 प्रतिशत आबादी तक बिजली पहुंच चुकी है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर स्थिति दर्शाती है। हालांकि बिजली पहुंचाने की गति अब पहले की अपेक्षा काफी धीमी हो गई है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि 2030 तक हर व्यक्ति को बिजली उपलब्ध करानी है तो वर्तमान प्रयासों की गति को लगभग तीन गुना बढ़ाना होगा। नीतिगत बदलाव के बिना नहीं होगा समाधान विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारों को ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, नीतिगत सुधार करने और विशेष रूप से गरीब तथा पिछड़े क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि बिजली और स्वच्छ ऊर्जा जैसी बुनियादी सुविधाएं हर व्यक्ति तक समान रूप से पहुंच सकें ये भी पढ़ें:अमेरिका-ईरान के बीच सुलह की कोशिश:दोहा में होगी बैठक, होर्मुज विवाद सुलझाने पर बनी सहमति; रिपोर्ट्स में दावा नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार तेज, लेकिन लाभ समान नहीं रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दुनिया स्वच्छ ऊर्जा की ओर लगातार बढ़ रही है। सौर और पवन ऊर्जा के विस्तार के कारण अब वैश्विक बिजली उत्पादन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से आने लगा है। इसके बावजूद अमीर और गरीब देशों के बीच स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में भारी अंतर बना हुआ है। उच्च आय वाले देशों में प्रति व्यक्ति नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ी है, जबकि कम आय वाले देशों में निवेश और संसाधनों की कमी के कारण यह वृद्धि काफी सीमित रही है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 29, 2026, 03:37 IST
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