Stem Cell: अब मानव स्टेम सेल से बनेंगे शुक्राणु, बांझपन से निजात; प्रजनन विज्ञान को मिली नई दिशा

प्रयोगशाला में कृत्रिम तरीके से मानव शुक्राणु तैयार करने की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शोधकर्ताओं ने मानव स्टेम सेल से ऐसी अपरिपक्व शुक्राणु कोशिकाएं विकसित की हैं, जो आगे चलकर परिपक्व शुक्राणु बनने की क्षमता रखती हैं। यह उपलब्धि पुरुष बांझपन के कारणों को समझने और भविष्य की प्रजनन चिकित्सा के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है। नेचर की रिपोर्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया का यह शोध वैज्ञानिक पत्रिका सेल स्टेम सेल में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने पहली बार मानव स्टेम सेल से विकसित शुरुआती शुक्राणु कोशिकाओं को जीवित चूहे के शरीर में विशेष रूप से तैयार किए गए वातावरण में विकसित किया। वैज्ञानिकों का उद्देश्य फिलहाल प्रयोगशाला में परिपक्व शुक्राणु बनाना नहीं, बल्कि मानव शुक्राणु बनने की शुरुआती जैविक प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझना है। इस शोध में वैज्ञानिकों ने पहले मानव कोशिकाओं को पुनः प्रोग्राम कर उन्हें प्रेरित बहु-क्षमता स्टेम सेल में बदला। पुरुष बांझपन के रहस्यों को समझने में मदद इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ फिलहाल पुरुष बांझपन पर शोध में होगा। वर्तमान में पुरुष बांझपन के लगभग 40% मामलों में वास्तविक कारण का पता नहीं चल पाता। यदि वैज्ञानिक शुरुआती शुक्राणु विकास की प्रक्रिया को विस्तार से समझ पाए, तो कई आनुवंशिक और जैविक कारणों की पहचान संभव हो सकेगी। इससे भविष्य में नई उपचार पद्धतियों और दवाओं के विकास का रास्ता भी खुल सकता है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि अगले चरण में यह साबित करना होगा कि प्रयोगशाला में तैयार हुई स्पर्मेटोगोनिया कोशिकाएं वास्तव में कार्यक्षम हैं या नहीं। शरीर की किसी भी कोशिका में बदल सकती हैं कोशिकाएं ये ऐसी कोशिकाएं होती हैं जो शरीर की लगभग किसी भी प्रकार की कोशिका में बदल सकती हैं। इसके बाद इन्हें विशेष जैविक संकेतों की मदद से उन प्रारंभिक जनन कोशिकाओं में परिवर्तित किया गया। इसके बाद इन कोशिकाओं को विकसित हो रहे चूहे के वृषण (टेस्टिस)की सहायक कोशिकाओं के साथ मिलाया गया। इस मिश्रण को चूहे की किडनी पर बनाई गई एक छोटी जैविक थैली में प्रत्यारोपित किया गया, जहां कोशिकाओं को बढ़ने और विकसित होने के लिए अनुकूल वातावरण मिला। चूहे की जैविक थैली में बनीं वृषण जैसी नलिकानुमा संरचनाएं चूहे की जैविक थैली में कोशिकाएं स्वयं व्यवस्थित होकर वृषण जैसी नलिकानुमा संरचनाएं बनाने लगीं। शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रत्यारोपण के लगभग छह महीने बाद मानव कोशिकाएं विकसित होकर स्पर्मेटोगोनिया नामक अवस्था तक पहुंच गईं। यही वे शुरुआती कोशिकाएं होती हैं जिनसे आगे चलकर परिपक्व शुक्राणु बनते हैं। इन कोशिकाओं में सक्रिय जीन सामान्य मानव स्पर्मेटोगोनिया से काफी हद तक मेल खाते पाए गए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 13, 2026, 03:34 IST
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