पंजाबी महिलाओं की थाली में पोषण कम: खर्च दिल खोल कर, प्रोटीन का सेवन नहीं; मर्दों से 11.17 फीसदी पीछे
पंजाब में प्रोटीनयुक्त भोजन पर खर्च के मामले में परिवार देश में चौथे स्थान पर हैं, लेकिन इस खर्च का लाभ महिलाओं को पुरुषों के बराबर नहीं मिल रहा। प्रदेश में पुरुषों के मुकाबले 11.17 प्रतिशत कम महिलाएं प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कर रही हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में 72.63 फीसदी पुरुष 3 से 4 तरह के प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ खाते हैं, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 61.46 फीसदी है। यानी परिवार में पौष्टिक भोजन पर खर्च होने के बावजूद महिलाओं की थाली में पोषण का हिस्सा कम है। चिंता इसलिए भी बढ़ जाती है कि प्रदेश में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 58.7 फीसदी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। प्रोटीनयुक्त भोजन पर हर महीने 1,342 रुपये खर्च एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों पर औसतन 1,342 रुपये प्रति परिवार मासिक खर्च किए जा रहे हैं। इस मामले में प्रदेश देश में चौथे स्थान पर है। सिक्किम 1,776 रुपये के औसत खर्च के साथ पहले, गोवा 1,711 रुपये के साथ दूसरे और हरियाणा 1,649 रुपये के साथ तीसरे स्थान पर है। पंजाब का खर्च इन राज्यों से कम है, लेकिन देश के अधिकांश राज्यों से अधिक है। दूसरी ओर, प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों पर सबसे कम खर्च करने वाले राज्यों में ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल हैं। ओडिशा में औसतन 656 रुपये, छत्तीसगढ़ में 729 रुपये और झारखंड में 774 रुपये मासिक खर्च हो रहे हैं। हालांकि, केवल खर्च के आधार पर किसी राज्य की पोषण स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता। खाद्य पदार्थों की कीमत, परिवार का आकार, आय और भोजन की उपलब्धता भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। महिला-पुरुष के बीच पोषण का बड़ा अंतर प्रोटीनयुक्त भोजन के सेवन में महिला-पुरुष के बीच अंतर पंजाब के अलावा दूसरे राज्यों में भी सामने आया है। ओडिशा में यह अंतर 22.75 प्रतिशत, तेलंगाना में 30.26 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 15.25 प्रतिशत दर्ज किया गया है। पंजाब में यह अंतर 11.17 प्रतिशत है। आंकड़े बताते हैं कि परिवार का भोजन पर अधिक खर्च करना जरूरी नहीं कि सभी सदस्यों को समान पोषण भी दे। घर में महिलाओं को मिलने वाले भोजन की मात्रा और विविधता भी महत्वपूर्ण है। पंजाब में 58.7 फीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 58.7 फीसदी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। एनीमिया में शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है। इससे शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित होती है। गर्भावस्था और प्रसव के दौरान एनीमिया महिलाओं के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है। गंभीर स्थिति में प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर खतरा और बढ़ जाता है। महिलाओं की थाली में भी हो संतुलित आहार आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में चुनौती केवल पौष्टिक भोजन पर खर्च बढ़ाने की नहीं, बल्कि परिवार की महिलाओं तक उसका समान लाभ पहुंचाने की भी है। दाल, दूध, दही, अंडे और अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों को दैनिक भोजन में शामिल करना जरूरी है। साथ ही महिलाओं के पोषण और स्वास्थ्य की नियमित जांच पर भी ध्यान देना होगा। पोषण की असली कसौटी यह नहीं कि परिवार भोजन पर कितना खर्च करता है, बल्कि यह है कि परिवार के हर सदस्य, खासकर महिलाओं को कितना संतुलित और पौष्टिक भोजन मिल रहा है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 02, 2026, 04:47 IST
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