नए समीकरणों की उम्मीद: पीएम मोदी की पांच देशों की यात्रा महज औपचारिक राजनयिक दौरा भर नहीं

ऐसे दौर में, जब पूरी दुनिया गहरे भू-राजनीतिक और आर्थिक संक्रमण से गुजर रही है तथा अनिश्चितताएं व तनाव अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा बदल रहे हैं, प्रधानमंत्री मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और चार यूरोपीय देशों की यात्रा के व्यापक कूटनीतिक, आर्थिक और सामरिक निहितार्थ हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यूएई की यह आठवीं यात्रा भले ही संक्षिप्त रही हो, लेकिन इसे कई मायनों में फलदायी माना जा रहा है। इसकी विशेष अहमियत इसलिए भी थी, क्योंकि यूएई के ओपेक से अलग होने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री वहां पहुंचे थे। इस दौरान, यूएई ने भारत में पांच अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई और दोनों देशों के बीच पेट्रोलियम व एलपीजी आपूर्ति तथा रक्षा क्षेत्र में हुए समझौते इसका संकेत हैं कि दोनों पारंपरिक संबंधों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में अग्रसर हैं। उल्लेखनीय है कि यूएई के बाद प्रधानमंत्री मोदी की यूरोपीय देशों की यात्रा भारत व यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौते के बाद हो रही है, जिसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा गया। दरअसल, यूरोप इस समय अमेरिका के साथ संबंधों में बढ़ती दरार और घटते विश्वास के बीच अपनी स्वतंत्र वैश्विक पहचान पुनर्परिभाषित करने में जुटा है। दूसरी ओर, भारत विनिर्माण, हरित ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में तेजी से उभरती शक्ति के रूप में सामने आ रहा है। ऐसे में यूरोपीय निवेश, तकनीक और विशेषज्ञता भारत की विकास यात्रा को नई गति दे सकती है। नीदरलैंड, जो यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक और चौथा सबसे बड़ा निवेशक है, के साथ संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय उल्लेखनीय है। हरित प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास के क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल स्वीडन के साथ संबंधों को भी रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति बनना भी महत्वपूर्ण है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी 43 वर्षों बाद नॉर्वे की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी बने हैं। भारत-नॉर्डिक सम्मेलन में आज उनकी हिस्सेदारी अपने आप में ऐतिहासिक है, जहां से अब इटली होते हुए वह लौटेंगे। स्पष्ट है कि तेजी से बहुध्रुवीय होती दुनिया में अमेरिका, चीन, रूस, यूरोप और पश्चिम एशिया के बीच शक्ति संतुलन बदल रहा है। ऐसे में, भारत ने अब तक रणनीतिक स्वायत्तता की नीति अपनाई है, जिसका मूल तत्व है कि भारत किसी एक शक्ति-गुट का हिस्सा बने बिना अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप सभी देशों के साथ संबंध विकसित करे। प्रधानमंत्री मोदी का पांच देशों का यह छह दिवसीय दौरा इसी नीति की निरंतरता का प्रतीक है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 19, 2026, 02:28 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




नए समीकरणों की उम्मीद: पीएम मोदी की पांच देशों की यात्रा महज औपचारिक राजनयिक दौरा भर नहीं #Opinion #National #NarendraModi #ForeignVisit #Uae #Europe #India-europeRelations #StrategicPartnership #Geopolitics #FreeTradeAgreement #Diplomacy #NordicSummit #SubahSamachar