काला सच: फिलीपीन में बच्चों के यौन शोषण का खौफनाक नेटवर्क, कैमरे के सामने परोसा जा रहा बचपन; कौन हैं खरीदार?

डिजिटल क्रांति के दौर में जहां दुनिया एक-दूसरे के करीब आई है, वहीं तकनीक का एक ऐसा घिनौना और खौफनाक चेहरा भी सामने आ रहा है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। द्वीपीय देश फिलीपीन में गरीबी का फायदा उठा मासूमों को बाल यौन शोषण सामग्री में बदला जा रहा है। उन्हें अपने देश में यौन शोषण का शिकार होना पड़ता है और अमीरों का शौक पूरा करने के लिए मीलों दूर स्थित शहरों में सीधे प्रसारित किया जाता है। सीएनएन की एक खोजी रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका और यूरोप जैसे अमीर देशों में बैठे लोग इसके बदले में बड़ी रकम खर्च करते हैं। फिलीपीन इस अवैध और खौफनाक ऑनलाइन नेटवर्क का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। 13 वर्ष की केट (बदला नाम) की कहानी इस भयावह सच्चाई को बयां करती है। कोविड-19 के दौरान जब केट के पिता की नौकरी चली गई और परिवार पाई-पाई को मोहताज हो गया तो परिवार को भुखमरी से बचाने के नाम पर उसकी गोद ली गई बड़ी बहन ने ही उसे कैमरे के सामने खड़ा कर दिया। शुरुआती दिनों में केट से केवल विदेशी ग्राहकों के साथ बातचीत बातचीत का नाटक करने को कहा गया। लेकिन धीरे-धीरे मांगें बदलती गईं और ऐसे खौफनाक और हिंसक कृत्यों की मांग की जाने लगी, जिनकी कल्पना मात्र से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। अपने ही कर रहे सौदाएिन्क्रप्टेड एप्स से मिला बढ़ावा बच्चों का सौदा करने वाले कोई और नहीं बल्कि उनके अपने परिवार वाले ही होते हैं। फिलिपिनो पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार दलालों में बड़ी संख्या उन माताओं की है, जिन्होंने आर्थिक तंगी के आगे अपने बच्चों का सौदा कर दिया। बच्चों का शोषण करने वाले खरीदार समाज के हर वर्ग से आते हैं। इनमें कॉलेज के छात्र, बिजनेसमैन, रेस्टोरेंट कर्मचारी से लेकर जलवायु सलाहकार और पढ़े-लिखे पेशेवर तक शामिल हैं। कई आरोपी तो ऐसे हैं जो खुद शादीशुदा हैं और जिनके घर में बच्चे व नाती-पोते हैं। ये भी पढ़ें:गाजा: तीन साल बाद समंदर की लहरों पर अठखेलियां कर संघर्ष को चुनौती दे रहे नन्हे जीवनरक्षक; कितने बच्चे बिछड़े पहले यह धंधा डार्क वेब तक सीमित था लेकिन अब टेलीग्राम, व्हाट्सएप और वाइबर जैसे एन्क्रिप्टेड एप्स तक फैल चुका है। nटेलीग्राम पर तो खुलेआम ऐसे प्राइवेट ग्रुप चलते हैं जहां कैंडी, किड्डी जैसे सांकेतिक शब्दों का इस्तेमाल करके सामग्री की नुमाइश की जाती है। बाकायदा मेन्यू और रेट लिस्ट होती है, जिसमें उम्र, लिंग और शोषण की भयावहता के हिसाब से दाम तय किए जाते हैं। ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम्स की वजह से पैसों का लेन-देन बेहद आसान हो गया है। हर 100 में एक बच्चा झेल रहा प्रताड़ना इंटरनेशनल जस्टिस मिशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपीन में करीब 5 लाख बच्चों को ऑनलाइन यौन सामग्री बनने को मजबूर किया जाता है। हर 100 में से एक बच्चा ऐसे अवैध तस्करी नेटवर्क के जाल में फंसा है। 2020 से 2022 के बीच अमेरिकी नागरिकों ने फिलीपीन से इस तरह की अवैध और हिंसक सामग्री खरीदने के लिए 70 लाख डॉलर (लगभग 58 करोड़ रुपये) से अधिक की राशि खर्च कर डाली। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने कई तरह की चुनौतियां अपराधी रिकॉर्डेड वीडियो की जगह लाइव स्ट्रीमिंग इस्तेमाल कर रहे हैं। लाइव प्रसारण खत्म होते ही कोई डिजिटल सबूत पीछे नहीं छूटता, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए ठोस सबूत जुटाना बेहद मुश्किल हो जाता है। एप्स की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन तकनीक अपराधियों को एक मजबूत सुरक्षा घेरा प्रदान करती है। यही नहीं, प्रशासनिक और आंतरिक प्राथमिकताओं के चलते कई बार जांच धीमी पड़ने की वजह से भी अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 12, 2026, 03:26 IST
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