पाकिस्तान-अफगान सीमा तनाव: छह दिन से जारी जंग के बीच तुर्किये ने की मध्यस्थता की पेशकश, क्या अब थमेगा संघर्ष?

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी झड़पें अब छठे दिन में पहुंच गई हैं। इसके बाद भीदोनों तरफे से हमले जारी है। इसी बीच अब इस मामले में तुर्किये की एंट्री हुई है। तुर्किये के राष्ट्रपतिरेसेप तैयप एर्दोगन ने दोनों देशों के बीच नया युद्धविराम कराने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। बता दें कि संघर्ष की शुरुआत पिछले हफ्ते हुई, जब अफगानिस्तान ने गुरुवार को पाकिस्तान पर हमले किए। यह हमला पाकिस्तान द्वारा पिछले सप्ताहांत किए गए हवाई हमलों के जवाब में बताया गया। इसके बाद पाकिस्तान ने सीमा पर सैन्य अभियान शुरू कर दिया और कहा कि वह अफगानिस्तान के साथ खुले युद्ध जैसी स्थिति में है। इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है। इससे पहले दोनों देशों के बीच अक्तूबर 2024 में कतर और तुर्किये की मदद से युद्धविराम हुआ था। उस समझौते के बाद इस्तांबुल में छह दिन तक बातचीत भी हुई और नवंबर में तीसरे दौर की वार्ता पर सहमति बनी थी। लेकिन 6 और 7 नवंबर को हुई बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला और शांति प्रक्रिया रुक गई। ये भी पढ़ें:-US-Iran War: ईरान युद्ध पर ट्रंप को शुरुआती राहत, रिपब्लिकन सांसदों ने खारिज किया जंग रोकने वाला प्रस्ताव तुर्किये का राष्ट्रपति और पाकिस्तानी पीएम की बातचीत तुर्किये के राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार,एर्दोगन ने फोन पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बातचीत की।उन्होंने पाकिस्तान में हुए आतंकी हमलों की निंदा की और कहा कि तुर्किये पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच फिर से युद्धविराम बहाल कराने में मदद करेगा। हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सीधे तौर पर इस प्रस्ताव की पुष्टि नहीं की, लेकिन बताया कि दोनों नेताओं ने 2,611 किलोमीटर लंबी अफगान-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव पर चर्चा की और क्षेत्र में शांति व स्थिरता के लिए संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। मामले में अफगान भी मौन दूसरी ओर अभी तक इस मामले में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार की ओर से एर्दोआन की पेशकश पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। हालांकि पिछले हफ्ते तुर्किये के विदेश मंत्री हकन फिदान ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी से सीमा पर हालात को लेकर बातचीत की थी।इसी बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीरने कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शांति तभी संभव है जब अफगान तालिबान पाकिस्तान विरोधी उग्रवादियों से अपने संबंध खत्म करे। उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। ये भी पढ़ें:-निवेशकों को राहत: युद्ध की छाया में भी अमेरिकी शेयर बाजार ने दिखाई ताकत, एसएंडपी 500 ने की 1% की मजबूत वापसी अब समझिए पूरे संघर्ष की कहानी गौरतलब है किसीमा पर लड़ाई मुख्य रूप से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान इलाकों में हो रही है। दोनों देश एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन मीडिया की पहुंच सीमित होने के कारण इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि पिछले पांच दिनों में 150 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि 28 अफगान सैनिक भी मारे गए। दूसरी ओर पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने कहा कि पिछले छह दिनों में 481 अफगान सैनिक मारे गए। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे उग्रवादी संगठन पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं। लेकिन काबुल की सरकार इन आरोपों से इनकार करती है और कहती है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं होने देती।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 05, 2026, 04:57 IST
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