News Updates: हैदराबाद में शख्स को एसयूवी ने घसीटा; केरल में राजकीय सम्मान से होगी मासूम अंगदाता की विदाई
हैदराबाद पुलिस ने शनिवार को बताया कि हैदराबाद में एक 45 वर्षीय व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जब उसने अपनी कार को टक्कर मारने से रोकने की कोशिश की तो एसयूवी ने कथित तौर पर उसे लगभग 200 मीटर तक घसीटा। इस घटना का एक कथित वीडियो तब से वायरल हो गया है।पीड़ित एक निजी कर्मचारी है, जो 9 फरवरी को दो सहकर्मियों के साथ कार में यात्रा कर रहा था। एसयूवी के चालक पर आरोप है कि उसने लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाया और पीछे से आ रही कार को टक्कर मार दी, लेकिन रुका नहीं। पीड़ित और उसके साथियों ने एसयूवी का पीछा किया और उस तक पहुंचने में कामयाब रहे। एसयूवी के चालक ने गाड़ी नहीं रोकी, इसलिए पीड़ित ने एसयूवी के सामने आकर उसे रोकने का प्रयास किया। हालांकि, एसयूवी चालक रुका नहीं और इसके बजाय पीड़ित को टक्कर मारकर आगे बढ़ गया, जिससे वह लगभग 200 मीटर तक घिसटता रहा। इससे पीड़ित को गंभीर चोटें आईं और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने बताया कि एसयूवी में सवार दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। राजकीय सम्मान से होगी मासूम अंगदाता की विदाई तिरुवनंतपुरम। केरल की 10 महीने की आलिन शेरिन अब्राहम को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। वह राज्य की सबसे कम उम्र की अंगदाता हैं। 5 फरवरी को कोट्टयम के पल्लम में एक सड़क दुर्घटना में आलिन घायल हो गई थीं। कोच्चि के अस्पताल में उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। उनके माता-पिता, अरुण अब्राहम और शेरिन एन जॉन ने छह अंगों को दान कर पांच बच्चों को नया जीवन दिया। मुख्यमंत्री पी विजयन ने इस फैसले को मानवता के लिए संदेश बताया। रविवार को पथानमथिट्टा में अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम संस्कार में पुलिस बिगुल बजाकर सलामी देगी। राज्यपाल आरवी अर्लेकर और स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने भी इस निस्वार्थ त्याग की सराहना की। ऐसी न्यायिक व्यवस्था बनाएं जहां पीड़ित खुद को सुरक्षित महसूस करें : सीजेआई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका का ऐसा ढांचा विकसित किया जाना चाहिए जहां आकर पीड़ित स्वयं को सुरक्षित महसूस करें। ठीक वैसे ही जैसे एक मरीज अस्पताल में पहुंचकर विश्वास और सुरक्षा का अनुभव करता है।सीजेआई रोहतक जिला बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित अभिनंदन समारोह में अधिवक्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में लंबित और नए मुकदमों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि आम जनता का न्यायपालिका पर भरोसा मजबूत हुआ है। इस विश्वास को बनाए रखने और अधिक सुदृढ़ करने की जिम्मेदारी न्याय व्यवस्था से जुड़े सभी लोगों की है। इससे पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में स्वर्ण जयंती द्वार का उद्घाटन किया। उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता का मूल मंत्र देते हुए कहा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए संयम, दृढ़ता और ईमानदारी आवश्यक है। तेज गति से आगे बढ़ने की होड़ में गहराई और गुणवत्ता से समझौता नहीं करना चाहिए। महत्वाकांक्षाएं रखें लेकिन नैतिकता से समझौता न करें।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 15, 2026, 04:05 IST
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