आज से नया आयकर कानून लागू: नियम होंगे आसान और पारदर्शी, 65 साल पुराना कानून अब इतिहास; समझिए सबकुछ
भारत के कर ढांचे में एक अप्रैल से बड़ा बदलाव हो गया है। पैन, आयकर रिटर्न फाइलिंग और विदेश में खर्च से जुड़े मामलों में कुछ महत्वपूर्ण ढांचागत बदलाव हुए हैं। करीब 65 साल पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह अब इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होगा। नए कानून का मकसद जटिल प्रावधानों को आसान व पारदर्शी बनाना, अनावश्यक धाराएं हटाना और टैक्स देने वालों के लिए नियमों का पालन करना और भी सुगम बनाना है। सरकार ने वित्त अधिनियम-2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। इससे कर प्रावधानों में बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। नए कानून में टैक्स की भाषा आसान की गई है। वित्त वर्ष व निर्धारण वर्ष के दोहरे सिस्टम को खत्म कर दिया गया है। एक अप्रैल से सिर्फ टैक्स ईयर का इस्तेमाल होगा। यानी जिस साल कमाई होगी, उसी साल को टैक्स के लिए माना जाएगा। टैक्स न देने वालों के लिए अलग फॉर्म की जरूरत खत्म कर दी गई है। ये अहम बदलाव भी आईटीआर फाइल करने की समयसीमा : वेतनभोगियों के लिए 31 जुलाई और अन्य करदाताओं के लिए 31 अगस्त आखिरी तारीख। ऑडिट वाले मामलों में यह 31 अक्तूबर रहेगी। कंपनियों की ओर से दिए उपहारों और वाउचर पर सालाना छूट 5,000 से बढ़ाकर 15,000 रुपये। बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता 100 से बढ़ाकर 3,000 महीना और हॉस्टल भत्ता 300 से बढ़ाकर 9,000 रुपये महीना किया गया। अब सिर्फ आधार के जरिये नहीं बनेगा पैन। बड़े लेनदेन पर पैन देना अनिवार्य होगा। मोटर एक्सीडेंट में मुआवजे पर ब्याज कर मुक्त। क्रेडिट कार्ड से 10 लाख रुपये से ज्यादा ऑनलाइन और 1 लाख से ज्यादा नकद खर्च की जानकारी आयकर विभाग को दी जाएगी। मकान किराये भत्ते के लिए सख्त नियम मकान किराये भत्ते (एचआरए) का दावा करने वालों के लिए नियम सख्त कर दिए गए हैं। अब किराये की फर्जी रसीद लगाकर टैक्स बचाना आसान नहीं होगा। कर्मचारियों को मकान मालिक का पैन नंबर देना होगा और किराये का पुख्ता सबूत भी दिखाना पड़ेगा। कुछ मामलों में मकान मालिक की पूरी जानकारी भी देनी पड़ेगी। बंगलूरू, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को मेट्रो शहरों में शामिल कर लिया गया है। इन शहरों को 50% तक एचआरए छूट मिलेगी, जो पहले 40% थी। धार्मिक-सामाजिक ट्रस्ट का पंजीकरण आसान पहले गैर-लाभकारी संगठनों से जुड़े कर प्रावधान पुराने कानून की सात तरह की धाराओं में थे। अब इन्हें एक ही धारा 17- बी में रखा गया है। धर्मार्थ ट्रस्ट के पंजीकरण और कर-कटौती योग्य दान की स्वीकृति के लिए एक ही तय फार्म भरना होगा। लाभ न लेने वाले ट्रस्ट रद्द करा सकेंगे पंजीकरण अस्थायी पंजीकरण की स्वीकृति अब केंद्रीकृत केंद्र के जरिये दी जाएगी। कोई कर लाभ न लेने वाले ट्रस्ट स्वेच्छा से अपना पंजीकरण रद्द कर सकते हैं। निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए आयकर फॉर्म हुए जारी आयकर विभाग ने निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) के सभी फॉर्म अधिसूचित कर दिए हैं। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आयकर विभाग ने आईटीआर-2, 3, 5, 6 और 7 के साथ अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने के लिए आईटीआर-यू फॉर्म को भी अधिसूचित किया।व्यक्तिगत करदाताओं और खातों का ऑडिट आवश्यक नहीं होने वाले करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। इसके पहले आईटीआर-1 व आईटीआर-4 फॉर्म 30 मार्च को अधिसूचित किए गए थे। इन फॉर्म का इस्तेमाल छोटे और मध्यम करदाता करते हैं। आईटीआर-1 सहज व आईटीआर-4 छोटे और मध्यम करदाताओं के लिए हैं। कौन-कौन लोग भर सकते हैं सहज फॉर्म सहज फॉर्म को ऐसे निवासी व्यक्ति भर सकते हैं जिनकी सालाना आय 50 लाख तक है और जिनकी आय वेतन, मकान, ब्याज व 5,000 रुपये तक की कृषि आय से होती है। सुगम फॉर्म उन व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवार और फर्म के लिए है, जिनकी कुल वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी आय व्यवसाय या पेशे से होती है। आईटीआर-2 फॉर्म उनके लिए है जिनकी आय पूंजीगत लाभ से आय होती है। आईटीआर-3 फॉर्म ऐसे व्यक्तियों के लिए है जिनका खुद का बिजनेस है। आईटीआर-5 फॉर्म एलएलपी, फर्म व सहकारी समितियां दाखिल करती हैं, जबकि आईटीआर-6 फॉर्म कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत कंपनियों के लिए है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 01, 2026, 05:47 IST
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