Netra AEW C: आसमान में भारत की तीसरी आंख और पैनी हुई, स्वदेशी रडार नेत्र को मंजूरी; जानें क्या है खासियत?

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी नेत्र एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्ल्यू एंड सी) प्रणाली का फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (एफओसी) सर्टिफिकेट भारतीय वायुसेना को सौंप दिया है। इसके साथ ही यह स्वदेशी प्रणाली पूरी तरह परिचालन के लिए तैयार हो गई है। इसके वायुसेना में पूरी क्षमता के साथ शामिल होने से हवाई निगरानी स्थितिजन्य जागरूकता और युद्ध प्रबंधन क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी। बृहस्पतिवार को बंगलूरू में आयोजित समारोह की अध्यक्षता वायुसेना उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने की। इस अवसर पर पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरके भदौरिया, डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. क्रिस्टोफर, नेत्र परियोजना के प्रमुख वैज्ञानिक एएस कुमारन तथा डीआरडीओ, वायुसेना और रक्षा उद्योग से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एयर मार्शलअवधेश कुमार भारती ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट हवाई कार्रवाई के दौरान नेत्र प्रणाली ने अपनी विश्वसनीयता और क्षमतासाबित की। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीक भारतीय सेनाओं को बदलते युद्ध के अनुसार अपने उपकरणों और प्रणालियों में तेजी से बदलाव करनेकी सुविधा देती है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय डीआरडीओ, वायुसेना और भारतीय रक्षा उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल को दिया। 2017 में मिली थी नेत्र परियोजना को शुरुआती मंजूरी डीआरडीओ के एयरोनॉटिक्स क्लस्टर की महानिदेशक डॉक राजालक्ष्मी मेनन ने नेत्र परियोजना के विकास की पूरी यात्रा और इसके सामने आई तकनीकी चुनौतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बेहतर सिस्टम इंजीनियरिंग और सटीक निर्णयों की बदौलत सभी उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए। नेत्र प्रणाली को वर्ष 2017 में इनिशियल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (आईओसी) मिला था। इसके बाद लगातार परीक्षण और सुधार के बाद अब इसे अंतिम परिचालन मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना को डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना और देश की रक्षा उद्योग इकाइयों ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है। कार्यक्रम में इस परियोजना को सफल बनाने वाले प्रमुख संगठनों और विशेषज्ञों को भी सम्मानित किया गया। ये भी पढ़ें:अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस:विकसित भारत के लिए नशामुक्त भारत का संकल्प लेना जरूरी, बचेंगी करोड़ों जिंदगियां 'नेत्र' रडार प्रणाली की खासियत नेत्र भारत की स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्रणाली है। इसे डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना और भारतीय रक्षा उद्योग ने मिलकर तैयार किया है। ■ भारत के पास फिलहाल दो तरह की एयरबोर्न अर्ली वार्निंग प्रणालियां हैं स्वदेशी नेत्र और इस्राइली तकनीक पर आधारित फॉल्कन । ■ इसे आसमान में उड़ती तीसरी आंख या फ्लाइंग रडार कहा जाता है, क्योंकि यह हवा में रहकर चारों ओर निगरानी करता है। ■ यह प्रणाली बड़े विमान पर लगे अत्याधुनिक राडार की मदद से सैकड़ों किलोमीटर दूर तक हवाई गतिविधियों पर नजर रख सकती है। ■ यह दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन, हेलिकॉप्टर और क्रूज मिसाइल का समय रहते पता लगा लेती है। यह निगरानी ही नहीं करता, बल्कि उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह भी काम करता है। ■ यह सुरक्षित डेटा लिंक के जरिये जमीन पर मौजूद कमांड सेंटर और लड़ाकू विमानों को रियल टाइम सूचना उपलब्ध कराता है। ■ इससे वायुसेना को दुश्मन के लक्ष्यों की पहचान, ट्रैकिंग व जवाबी कार्रवाई करने में तेजी मिलती है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 26, 2026, 02:59 IST
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