Bihar: अमर उजाला की खबर का असर; मनरेगा जांच में खुली कई परतें, कई अधिकारी और कर्मी जिम्मेदार

मोतिहारी में मनरेगा योजना में हुए घोटाले की खबर बीते दिनों अमर उजाला ने प्रमुखता से दिखाई थी। अब खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन की नींद खुली है और पूरे मामले में मुखिया समेत कई कर्मियों को दोषी ठहराया गया है। विजयी पंचायत में बड़े पैमाने पर अनियमितता उजागर पूरा मामला पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन प्रखंड स्थित विजयी पंचायत से जुड़ा है, जहां मनरेगा सहित विभिन्न योजनाओं में अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। बता दें कि अमर उजाला ने जिले के विजयी पंचायत में हुए मनरेगा में हुए भ्रष्टाचार को प्रमुखता से उजागर किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने त्रि-स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया था। इसके बाद जांच टीम के द्वारा लाखों रुपये की वसूली का आदेश जारी किया गया है। यह पंचायत पहले से ही विवादों में रही है, लेकिन इस बार जांच में गंभीर गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रशासन सख्त हुआ है। जांच में लाखों की वसूली तय जांच रिपोर्ट के अनुसार, मनरेगा की 9 योजनाओं में 11,12,723 रुपये, सोख्ता निर्माण में 3,22,153 रुपये तथा डस्टबिन क्रय व वितरण में 3,32,000 रुपये की वसूली निर्धारित की गई है। मामले में कई पदाधिकारियों, कर्मियों और जनप्रतिनिधियों पर जिम्मेदारी तय की गई है। वसूली के दायरे में तत्कालीन कार्यक्रम पदाधिकारी नदीम अहमद, लेखापाल अशोक प्रसाद, कनीय अभियंता भारतेंदु विमल, पंचायत तकनीकी सहायक सुरेंद्र राम, मुखिया सविता देवी और पंचायत रोजगार सेवक जयप्रकाश नारायण शामिल हैं। अलग-अलग योजनाओं में जिम्मेदारी तय इसके अलावा सोख्ता निर्माण योजना में मुखिया सविता देवी, पंचायत सचिव प्रदीप कुमार, तकनीकी सहायक सूर्य राम, लेखापाल-सह-आईटीओ विभूति नारायण तथा प्रखंड समन्वयक विनोद कुमार महतो पर भी वसूली का आदेश दिया गया है। डस्टबिन योजना में भी मुखिया सविता देवी, पंचायत सचिव प्रदीप कुमार और प्रखंड समन्वयक विनोद कुमार महतो को जिम्मेदार ठहराया गया है। ये भी पढ़ें:व्यवसायी की हत्या कर शव को दुकान में किया बंद, पूर्व मालिक पर लगा हत्या का आरोप, आरोपी गिरफ्तार जांच में गड़बड़ी की पुष्टि, कार्रवाई शुरू जांच में कार्यों की गुणवत्ता खराब, माप पुस्तिका में गड़बड़ी और नियमों के विरुद्ध कार्य कराए जाने की पुष्टि हुई है। स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिलने पर सभी के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही मनरेगा कर्मियों के मानदेय से दो वर्षों तक 20 प्रतिशत कटौती का भी निर्देश दिया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और अन्य पंचायतों में भी जांच की संभावना बढ़ गई है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 29, 2026, 10:18 IST
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