MEA: 'सबसे ज्यादा भारतीय नाविकों की मौत हुई', फारस की खाड़ी में हमलों पर क्या बोला विदेश मंत्रालय?

विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि भारत लगातार होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते सुरक्षित और जहाजों की निर्बाध आवाजाही और व्यापार जारी रखने की अपील करता है। उन्होंने कहा कि यह पूरी दुनिया के लोगों की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत जरूरी है। हमले में भारतीय नागरिक की मौत पर क्या कहा एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने ईरान के उप मिशन प्रमुख को तलब करने के बाद इस मामले पर एक बयान जारी किया। प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने ईरानी पक्ष के सामने अपनी गहरी चिंता सामने रखी और जो कुछ हुआ उसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस घटना में भारत ने एक नागरिक को खो दिया है और कई भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है। उन्होंने कहा कि भारत ने इस मामले में ईरान के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और साफ कहा है कि ऐसे हमले जल्द से जल्द रुकने चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि तनाव कम करने की जरूरत है। दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर आना चाहिए और संवाद व कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए, ताकि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता कायम की जा सके। 'खाड़ी में हमलों में सबसे अधिक भारतीय नाविकों की मौत हुई' विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि खाड़ी में हुए हमलों में सबसे ज्यादा भारतीय नाविकों की मौत हुई है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों और नाविकों को लेकर कहा, आपने जो सवाल पूछा, उससे जुड़ी पूरी जानकारी इस समय मेरे पास नहीं है। लेकिन मैं बता सकता हूं कि कल रात जिन दो जहाजों पर हमला हुआ, उनमें कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे।उन्होंने कहा, एक जहाज पर 12 लोग सवार थे, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। दूसरे जहाज पर 18 भारतीय नाविक सवार थे, जिनमें से 9 गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इनमें से 2 की हालत गंभीर है। रणधीर जायसवाल ने कहा, मैं यह भी बता सकता हूं कि सभी देशों के नागरिकों में भारतीय नाविकों ने वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों में सबसे ज्यादा मौत का सामना किया है।हालांकि, मैं गलत आंकड़े नहीं देना चाहता। क्षेत्र में हमारे कुल कितने जहाज हैं और कुल कितने लोग हताहत हुए हैं, इससे जुड़ी जानकारी मैं इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के खत्म होने के बाद साझा करूंगा। पीओके में विरोध प्रदर्शनों पर क्या कहा विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ये प्रदर्शन पाकिस्तान की दशकों पुरानी व्यवस्था के तहत किए गए शोषण, लोगों के मौलिक अधिकारों से इनकार और अवैध व जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों में किए जा रहे प्रशासनिक अत्याचार का सीधा नतीजा हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की जायज समस्याओं का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान सरकार ने अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि भारत उम्मीद करता है और चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को इन गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों और गलत कामों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराए। दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर क्या कहा दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर जायसवाल ने कहा कि इस मामले में भारत का रुख स्पष्ट और पहले से चिर-परिचित है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्री मार्गों और हवाई क्षेत्र से गुजरने की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर देता है। यह संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून समझौते के अनुसार है। इसके अलावा समुद्र के अन्य वैध उपयोग और बिना किसी बाधा के व्यापार को बनाए रखने की जरूरत पर भी भारत जोर देता है। ये भी पढ़ें:होर्मुज में भारतीय नागरिक की मौत पर केंद्र सरकार का एक्शन, ईरानी अधिकारियों को किया तलब उन्होंने कहा कि समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून समझौते के अनुसार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दस साल पहले मध्यस्थता न्यायाधिकरण की ओर से दिया गया फैसला एक अहम पड़ाव है और संबंधित पक्षों के बीच विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का आधार है। विदेश मंत्री के खाड़ी देशों के दौरे पर क्या कहा विदेश मंत्री एस जयशंकर की खाड़ी देशों की यात्रा को लेकर रणधीर जायसवाल ने कहा कि विदेश मंत्री ने खाड़ी क्षेत्र के चार देशों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि इन चारों देशों कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान में विदेश मंत्री ने वहां के नेतृत्व से व्यापक बातचीत की। इनमें उच्च स्तर के नेताओं के साथ हुई बैठकें भी शामिल थीं। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री ने इन चारों देशों के अपने समकक्षों से भी मुलाकात की और व्यापार, ऊर्जा तथा निवेश जैसे कई अह मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन बातचीत में ऊर्जा एक अहम विषय रहा। इसके अलावा पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं पर भी चर्चा हुई और इस मुद्दे पर सभी पक्षों ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र की इस यात्रा के दौरान ऊर्जा सुरक्षा बातचीत का एक अहम हिस्सा रही।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 14, 2026, 13:44 IST
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