El Nino Alert: इतिहास का दूसरा सबसे गर्म मई, अल नीनो की वापसी के संकेत; पृथ्वी का तापमान खतरनाक स्तर के करीब
पृथ्वी का तापमान लगातार नए चेतावनी संकेत दे रहा है। यूरोपीय जलवायु एजेंसी कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 इतिहास का दूसरा सबसे गर्म मई रहा। इस दौरान वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक-पूर्व स्तर से 1.42 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया, जिससे दुनिया एक बार फिर 1.5 डिग्री सेल्सियस की महत्वपूर्ण जलवायु सीमा के बेहद करीब पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार न केवल भूमि बल्कि महासागर भी असामान्य रूप से गर्म रहे हैं और भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बढ़ता तापमान अल नीनो की संभावित वापसी का संकेत दे रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे आने वाले महीनों में सूखा, बाढ़, लू और अन्य चरम मौसमी घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है। साथ ही आर्कटिक व अंटार्कटिका में घटती समुद्री बर्फ भी जलवायु संकट की गंभीरता को रेखांकित कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार मई में पृथ्वी की सतह का औसत तापमान 15.81 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह 1991-2020 की औसत अवधि की तुलना में 0.55 डिग्री सेल्सियस अधिक है। यदि इसकी तुलना औद्योगिक क्रांति से पहले यानी 1850-1900 के औसत तापमान से की जाए तो यह 1.42 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। यह स्तर उस 1.5 डिग्री सेल्सियस सीमा के बेहद करीब है, जिसे वैज्ञानिक लंबे समय से जलवायु परिवर्तन के खतरनाक प्रभावों का संकेतक मानते रहे हैं। हालांकि अब तक का सबसे गर्म मई 2024 में दर्ज किया गया था, लेकिन 2026 का मई भी चिंताजनक रूप से उसके करीब रहा। मई के शुरुआती दिनों में यूरोप का मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहा, लेकिन 20 मई के आसपास परिस्थितियां तेजी से बदलीं और पश्चिमी यूरोप में वर्ष की शुरुआती सबसे तीव्र गर्मी की लहरों में से एक दर्ज की गई। फ्रांस, ब्रिटेन, आयरलैंड और पुर्तगाल में मई महीने के तापमान के कई रिकॉर्ड टूट गए। कई क्षेत्रों में नमी और उमस के कारण महसूस होने वाला तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दुनियाभर में चरम मौसम का विस्तार रिपोर्ट के अनुसार यूरोप के बाहर भी मौसम की असामान्य गतिविधियां दर्ज की गईं। उत्तरी अमेरिका, ब्राजील, भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर में स्थित एशिया के कई हिस्सों, पश्चिमी चीन, दक्षिणी अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई। वहीं मध्य अमेरिका, मध्य एशिया, मेडागास्कर, दक्षिण अमेरिका तथा दक्षिण-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के बड़े हिस्से अपेक्षाकृत अधिक शुष्क रहे। ध्रुवीय क्षेत्रों में घटती बर्फ ने बढ़ाई चिंता जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मई 2026 के दौरान आर्कटिक में समुद्री बर्फ का विस्तार औसत से लगभग 4 प्रतिशत कम रहा, जो मई महीने के लिए चौथा सबसे निचला स्तर है। वहीं अंटार्कटिका में समुद्री बर्फ का विस्तार सामान्य से 9 प्रतिशत कम दर्ज किया गया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 11, 2026, 03:50 IST
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