प्रेम, विनम्रता और भगवान में अटूट विश्वास से होती है सच्चे भक्त की पहचान : महाराज
संवाद न्यूज एजेंसीसोनीपत। गुड़ मंडी स्थित अग्रवाल धर्मशाला में श्री चैतन्य महाप्रभु संकीर्तन मंडल के तत्वावधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सातवें दिन श्रील भक्ति प्रसाद विष्णु गोस्वामी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के द्वारका लीला, सुदामा चरित्र व भगवान के भक्तों के प्रति उनके प्रेम की अद्भुत झलकियों का वर्णन किया। महाराज ने बताया कि सच्चे भक्त की पहचान उसके प्रेम, विनम्रता और भगवान में अटूट विश्वास से होती है। उन्होंने बताया कि जरासंध के वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने उनके पुत्र को राजगद्दी पर बैठाया। सुदामा प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जब सुदामा की पत्नी सुशीला को ज्ञात हुआ कि द्वारकाधीश श्रीकृष्ण उनके बचपन के मित्र हैं तो उन्होंने सुदामा को श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका जाने के लिए प्रेरित किया।सुदामा के महल पहुंचने पर द्वारकाधीश श्रीकृष्ण नंगे पैर दौड़कर उनसे मिले और उन्हें अपने महल में लेकर आए। भगवान ने सुदामा की पोटली से दो मुट्ठी चावल खाया। तीसरी मुट्ठी खाने से पहले देवी रुक्मिणी ने उन्हें रोक लिया। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा को दो मुट्ठी चावल के बदले दो लोक प्रदान किए। श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर हरे कृष्ण हरे राम के महामंत्र का संकीर्तन करते रहे। समापन दिवस पर शुक्रवार को पूर्णाहुति पर हवन व भंडारा का आयोजन किया जाएगा। दोपहर दो बजे भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा नई अनाज मंडी दुकान नंबर 101 से शुरू होगी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 12, 2026, 19:35 IST
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