UP: लोक कला की महान साधिका तीजन बाई का निधन, शोक में लोक कला जगत; ताज महोत्सव में भी दी थी प्रस्तुति
महाभारत को अपनी अनूठी पंडवानी शैली में जीवंत कर देश-दुनिया में भारतीय लोक कला की पहचान बनाने वाली सुप्रसिद्ध लोक गायिका तीजन बाई के निधन से कला जगत में शोक की लहर है। उनके निधन की खबर से आगरा के कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों में भी गहरा दुख है। वर्ष 2013 में ताज महोत्सव के दौरान उन्होंने आगरा में अपनी प्रस्तुति से हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। उनकी ओजपूर्ण आवाज, सशक्त अभिनय और सहज संवाद शैली ने उस प्रस्तुति को ताज महोत्सव के यादगार आयोजनों में शामिल कर दिया। ये भी पढ़ें -भिंडी बनी मुसीबत:आगरा-दिल्ली हाईवे पर आफत, मुश्किल में पड़ गए लोग; एक के बाद एक गिरते रहे बाइक सवार वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल शुक्ल बताते हैं कि तीजन बाई महाभारत को पंडवानी शैली में प्रस्तुत करने वाली भारत की पहली महिला लोक कलाकार थीं। इससे पहले पंडवानी शैली की प्रस्तुति पुरुष दिया करते थे। उन्होंने एक महिला होने के नाते चुनौती को स्वीकारा और पंडवानी शैली में प्रस्तुति देने के लिए महिलाओं के लिए दरवाजे खोले। आज उन्हीं को देख कर महिलाएं पंडवानी शैली में प्रस्तुति दे रही हैं। मंच पर आते ही वह दर्शकों से ऐसा जुड़ाव बना लेती थीं कि हर व्यक्ति स्वयं को महाभारत का प्रत्यक्ष साक्षी महसूस करता था। ये भी पढ़ें -इश्क में सनक की इंतहा:प्रेमिका ने शादी से किया मना, तो घर में घुसा प्रेमी; ऐसा कांड किया; तलाश में जुटी पुलिस अद्भुत थी तीजन बाई की कला साहित्यकार अरुण डंग का कहना है कि महाभारत को पंडवानी शैली में प्रस्तुत करने की उनकी कला अद्भुत थी। जब भी वे प्रस्तुति देती थीं, दर्शकों से सीधा संवाद स्थापित कर लेती थीं। उनके चेहरे के भाव और अभिनय इतने सटीक होते थे कि पूरा वातावरण महाभारतमय हो जाता था। उनके निधन से भारतीय लोक कला की अपूरणीय क्षति हुई है। ये भी पढ़ें -ससुराल में मौत:शादी के नौ साल बाद विवाहिता की चली गई जान, ऐसी हुई हालत; मायके वालों ने लगाए गंभीर आरोप जितनी बड़ी कलाकार, उतनी सरल इंसान गजल गायक सुधीर नारायण ने बताया कि ताज महोत्सव 2013 में उनके साथ मंच पर रहने का अवसर मिला। तीजन बाई जितनी बड़ी कलाकार थीं, उतनी ही सरल और विनम्र इंसान थीं। पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित होने के बावजूद उनमें बिल्कुल अहंकार नहीं था। उनका व्यवहार बेहद आत्मीय था। उनकी प्रस्तुति और सादगी आज भी स्मृतियों में ताजा है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 06, 2026, 10:03 IST
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