कैलाश मानसरोवर यात्रा : 52 भारतीय नेपाल में फंसे, चीन पर वीजा रोकने का आरोप; विदेश मंत्रालय से दखल की अपील
कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर निकले लगभग 52 भारतीय वर्तमान में नेपाल की राजधानी काठमांडू में फंसे हैं और मदद का इंतजार कर रहे हैं। राकांपा (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने शनिवार को यह जानकारी दी और विदेश मंत्रालय से मामले में हस्तक्षेप की अपील की ताकि श्रद्धालु अपनी आगे की यात्रा को सुचारु रूप से जारी रख सकें। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सुले ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास, बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास से आग्रह किया कि वे इस मामले पर ध्यान दें और आवश्यक सहायता प्रदान करें। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, काठमांडू में फंसे ये सभी यात्री पुणे के निवासी हैं। दावा है चीन की सरकार ने इन्हें यात्रा के लिए आवश्यक परमिट जारी कर दिए थे और शुल्क भी वसूल लिया था लेकिन अंतिम समय में उनके वीजा रोक दिए गए। पिछले चार दिनों से ये सभी यात्री काठमांडो में वीजा का इंतजार कर रहे हैं। पांच साल बाद शुरू हुई यात्रा कैलाश मानसरोवर यात्रा पर शुरुआत में 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण और बाद में पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर दोनों देशों में सैन्य गतिरोध के कारण रोक लगा दी गई थी। रूस के कजान में 2024 में पीएम नरेंद्र मोदी व चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध बहाल हुए और पांच साल बाद गत वर्ष जून में यात्रा बहाल हुई। ये भी पढ़ें:आसान कनेक्टिविटी के बिना अधूरी इलेक्ट्रिक वाहन नीति, अध्ययन ने खोली परिवहन व्यवस्था की परतें 21 जून को तिब्बत में दाखिल हुआ श्रद्धालुओं का पहला जत्था कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों का पहला जत्था 21 जून को नाथूला दर्रे से होते हुए चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत में दाखिल हुआ था। इस जत्थे में चार संपर्क अधिकारियों और एक चिकित्सा अधिकारी समेत कुल 44 तीर्थयात्री शामिल हैं। इस जत्थे को सिक्किम के गवर्नर ओम प्रकाश माथुर ने पर्यटन मंत्री शेरिंग थेंडुप भूटिया हरी झंडी दिखाकर तिब्बत के ग्यांत्से के लिए रवाना किया था। विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी वहीं, विदेश मंत्रालय ने निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने शनिवार को अपने बयान में कहा कि उसे कई ऐसे अनुरोध मिले हैं, जिनमें भारतीय नागरिक नेपाल में फंसे हुए हैं, जो बिना चीन के जरूरी प्रवेश परमिट और वीजा के निजी टूर ऑपरेटरों की ओर से आयोजित यात्रा के जरिये कैलाश मानसरोवर यात्रा कर रहे थे। नागरिकों को सलाह दी गई है कि जब तक यात्रा के लिए सभी जरूरी दस्तावेज प्राप्त नहीं हो जाते, तब तक भारत से यात्रा शुरू न करें। बिना पक्के दस्तावेजों के या इस उम्मीद में यात्रा शुरू करना कि बाद में दस्तावेज मिल जाएंगे, फंसने की संभावना बढ़ा देता है। बयान में आगे कहा गया है कि तीर्थयात्रियों को यह भी सख्ती से सलाह दी जाती है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनका टूर ऑपरेटर विधिवत पंजीकृत और अधिकृत हो।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 28, 2026, 03:31 IST
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