West Asia Crisis Impact: घरेलू और कामर्शियल एलपीजी पर सरकार ने दिया बड़ा अपडेट, कहा- हमारे पास पर्याप्त सप्लाई
पश्चिम एशिया में इन दिनों भारी तनाव और युद्ध जैसा माहौल है। इस्राइल और अन्य देशों के बीच चल रहे इस बड़े संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। इसी बीच, भारत सरकार ने सोमवार को एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता की। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य देश की जनता को यह बताना था कि बाहर चल रहे इस युद्ध का भारत की जरूरी चीजों पर क्या असर पड़ रहा है। खाद, गैस और तेल के साथ-साथ मंत्रालय ने कई मुद्दों पर जानकारी दी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि हमारे पास किसानों के लिए खाद का भरपूर भंडार है, रसोई गैस की कोई किल्लत नहीं है और हमारे जो भी नागरिक या नाविक बाहर फंसे हैं, उन्हें सुरक्षित निकाला जा रहा है। अलग-अलग मंत्रालयों ने मिलकर काम करते हुए यह पक्का किया है कि देश के अंदर किसी भी जरूरी सामान की सप्लाई चेन न टूटे। अफवाहों और डर के कारण कुछ लोग जरूरत से ज्यादा सामान खरीद रहे हैं, जिस पर सरकार ने रोक लगाने और सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। क्या देश में किसानों के लिए खाद की कमी है उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि देश में खाद यानी फर्टिलाइजर का भंडार बहुत मजबूत है। खरीफ की फसल के लिए जितनी खाद चाहिए, उससे कहीं ज्यादा हमारे गोदामों में भरी हुई है। उदाहरण के लिए, जहां 18.17 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत थी, वहीं हमारे पास 71.58 लाख मीट्रिक टन मौजूद है। इसी तरह डीएपी खाद भी जरूरत से कई गुना ज्यादा है। सबसे अच्छी बात यह है कि संकट के बाद भी यूरिया के एक बैग (45 किलो) की कीमत 266.5 रुपये और डीएपी की कीमत 1350 रुपये ही है, इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। क्या गैस सिलेंडर और पेट्रोल खत्म होने वाला पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी गैस की सप्लाई पूरी तरह से 100 प्रतिशत सुरक्षित है। कमर्शियल गैस का कोटा भी 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। कुछ जगहों पर लोग डर के मारे ज्यादा गैस और पेट्रोल खरीद रहे हैं (पैनिक बाइंग), लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास गैस की कोई कमी नहीं है। कालाबाजारी रोकने के लिए 93 प्रतिशत गैस सिलेंडर एक खास कोड (ऑथेंटिकेशन) के जरिए ही बांटे जा रहे हैं। जिन डिस्ट्रीब्यूटर्स ने नियमों को तोड़ा है, उन पर छापे मारे गए हैं और 71 एजेंसियों को सस्पेंड भी किया गया है। ये भी पढ़ें-West Bengal:DGP सिद्ध नाथ का कार्यकाल छह माह बढ़ा; गृह मंत्री बोले- केंद्रीय बल चुनाव बाद सात दिन और रुकेंगे होर्मुज के पास जहाज पर क्या घटना घटी समुद्री रास्तों और शिपिंग के बारे में जानकारी देते हुए निदेशक मनदीप सिंह रंधावा ने बताया कि 25 अप्रैल को ओमान के पास एक बड़ी घटना हुई थी। 'एमटी सिरोन' नाम का एक केमिकल टैंकर जहाज होर्मुज के रास्ते से गुजर रहा था। तभी ईरान के कोस्टगार्ड ने उसे रोका और चेतावनी देने के लिए गोलियां भी चलाईं। इस जहाज पर कुछ भारतीय नाविक भी सवार थे। सरकार ने साफ किया है कि जहाज पर मौजूद सभी 17 भारतीय नाविक पूरी तरह से सुरक्षित हैं और भारत के बंदरगाहों पर भी किसी तरह की कोई रुकावट या भारी भीड़ नहीं है। खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को कैसे बचाया जा रहा शिपिंग और विदेश मंत्रालय मिलकर बाहर फंसे भारतीयों को लगातार वापस ला रहे हैं। एक खास कंट्रोल रूम बनाया गया है जो दिन-रात काम कर रहा है। अब तक 7 हजार से ज्यादा कॉल सुने गए हैं और 2,770 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित देश वापस लाया जा चुका है। विदेश मंत्रालय के अधिकारी असीम आर. महाजन ने बताया कि वहां रहने वाले भारतीयों की मदद के लिए चौबीसों घंटे हेल्पलाइन चालू है। हमारी एंबेसी वहां के स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर हर एक भारतीय की सुरक्षा पक्की कर रही है। कूटनीति के बीच भारत का क्या कदम भारत सरकार सिर्फ बचाव ही नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर कूटनीति भी कर रही है। विदेश मंत्रालय के अधिकारी रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने 25 और 26 अप्रैल को यूएई का दौरा किया था। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी वहां गए थे। इन मुलाकातों में आपसी साझेदारी और सुरक्षा पर बड़ी चर्चा हुई। ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और वैश्विक हालातों पर उनकी भी नजर है, लेकिन भारत किसी दूसरे देश के भरोसे बैठे बिना सीधे तौर पर खाड़ी देशों के शीर्ष नेताओं से बात करके अपने नागरिकों के हित सुरक्षित कर रहा है। इस्राइल और ईरान जाने वाली उड़ानों का क्या हाल है उड़ानों की स्थिति अब काफी सुधर रही है। 28 फरवरी से लेकर अब तक लगभग 13 लाख 19 हजार यात्री उस क्षेत्र से भारत आ चुके हैं। यूएई, सऊदी अरब और ओमान से भारत के लिए लगातार उड़ानें चल रही हैं। इस्राइल का एयरस्पेस (हवाई रास्ता) खुला हुआ है और वहां से भी भारत के लिए उड़ानें चालू हैं। हालांकि, ईरान का एयरस्पेस अभी भी पूरी तरह से नहीं खुला है। इसलिए सरकार ने भारतीयों को सलाह दी है कि वे अभी ईरान की यात्रा न करें और जो लोग वहां हैं, वे जमीनी रास्ते से बाहर निकलें। अब तक 2,461 भारतीयों को सड़क के रास्ते ईरान से निकाला जा चुका है। ब्रिक्स बैठक में फलस्तीन और यरूशलम पर क्या बात हुई प्रेस वार्ता के अंत में पत्रकारों ने कूटनीतिक रुख पर भी सवाल पूछे। एक सवाल ब्रिक्स देशों की बैठक में फलस्तीन के मुद्दे को लेकर था। पूछा गया कि क्या भारत ने फलस्तीन पर अपना पुराना रुख बदल लिया है और यरूशलम को फलस्तीन की राजधानी के रूप में क्यों नहीं लिखा गया इस पर विदेश मंत्रालय ने साफ जवाब दिया कि हाल ही में दिल्ली में हुई ब्रिक्स अधिकारियों की बैठक में जॉइंट स्टेटमेंट (संयुक्त बयान) इसलिए नहीं आ पाया क्योंकि पश्चिम एशिया के मौजूदा युद्ध को लेकर सदस्य देशों के बीच विचारों में अंतर था। हालांकि, भारत हमेशा शांति और सुरक्षा का पक्षधर रहा है और कूटनीतिक मोर्चे पर शांति स्थापना की कोशिशें जारी हैं। अन्य वीडियो-
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 27, 2026, 12:39 IST
West Asia Crisis Impact: घरेलू और कामर्शियल एलपीजी पर सरकार ने दिया बड़ा अपडेट, कहा- हमारे पास पर्याप्त सप्लाई #IndiaNews #National #SubahSamachar
