Social Media: इंस्टा-यूट्यूब की लत ने छीना बचपन, युवती का चौंकाने वाला खुलासा; मेटा और गूगल पर मुकदमा

अमेरिका के लॉस एंजिलिस में चल रहे एक बहुचर्चित मुकदमे में 20 वर्षीय एक युवती ने मेटा और गूगल पर आरोप लगाया है कि इंस्टाग्राम और यूट्यूब की लत ने उसका बचपन छीन लिया। अदालत में जूरी के सामने उसने कहा कि वह सुबह उठते ही इंस्टाग्राम देखती थी और देर रात तक सोशल मीडिया पर रहती थी, जिससे उसके पारिवारिक संबंध, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा। निजता की सुरक्षा के लिए केजीएम या कैली नाम से पहचानी जा रही युवती ने अदालत को बताया कि उसने 6 साल की उम्र में यूट्यूब और 9 साल की उम्र में इंस्टाग्राम का इस्तेमाल शुरू किया। उसने कहा कि उसकी कम उम्र के बावजूद इन प्लेटफॉर्म्स पर उसे रोकने के लिए कोई प्रभावी बाधा नहीं थी।उसने जूरी से कहा, मैंने परिवार के साथ जुड़ना बंद कर दिया क्योंकि मैं अपना सारा समय सोशल मीडिया पर बिताती थी। चिंता और अवसाद के लक्षण कैली को बॉडी डिस्मॉर्फिया का निदान किया गया है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी शारीरिक बनावट को लेकर अत्यधिक चिंता करता है। उसके वकील मार्क लेनियर के सवाल पर कि क्या सोशल मीडिया से पहले उसे ऐसे विचार आते थे, कैली ने जवाब दिया, नहीं। उसने यह भी कहा, 9 व 10 वर्ष की उम्र में उसे पहली बार चिंता, अवसाद के लक्षण महसूस हुए। किशोरावस्था में इन विकारों का औपचारिक निदान हुआ। 10 साल की उम्र तक वह खुद को नुकसान पहुंचाने लगी थी और खुद को काटने जैसी हरकतें करती थी। मुकदमे की पृष्ठभूमि और अन्य कंपनियां केस में शुरुआत में टिकटॉक और स्नैपचैट को भी शामिल किया गया था, लेकिन ट्रायल से ठीक पहले दोनों कंपनियों ने समझौता कर लिया। केस का फैसला, जो मार्च में आने की उम्मीद है, यह तय करेगा कि सोशल मीडिया कंपनियों की अपने सबसे कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के प्रति कानूनी जिम्मेदारी क्या है। मेटा का बचाव मेटा के वकीलों ने तर्क दिया कि कैली की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की जड़ उसके पारिवारिक जीवन में थीं। प्रमुख वकील पॉल श्मिट ने ट्रायल के पहले दिन उन बयानों का हवाला दिया जो कैली ने केस दायर करने से पहले अपने घरेलू जीवन के बारे में दिए थे। जकरबर्ग की पेशी और मुकदमे का महत्व कैली की गवाही उस समय आई जब एक सप्ताह पहले मेटा के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जकरबर्ग लगभग 7 घंटे तक जिरह के लिए जूरी के सामने पेश हुए थे। यह मुकदमा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर एक ऐतिहासिक कानूनी परीक्षा माना जा रहा है। इसके नतीजे न केवल मेटा और गूगल के लिए, बल्कि पूरे डिजिटल उद्योग के लिए एक मिसाल तय कर सकते हैं कि बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी कितनी व्यापक है। अन्य वीडियो:-

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 28, 2026, 03:48 IST
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