INS Nistar: पाकिस्तानी पनडुब्बी की कब्र पर फिर खड़ा होगा भारत का 'निस्तार', 55 साल बाद हुई वापसी
भारतीय नौसेना के साल 2026 के सबसे बड़े आयोजनों इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) और मिलन में पाकिस्तान और चीन को हमेशा बाहर रखा जाता है। लेकिन, पाकिस्तान के जख्म हरे करने के लिए यह इवेंट ही काफी है। वजह है इसका आयोजन विशाखापत्तनम में होना। यह वही जगह है, जहां 1971 की जंग के दौरान पाकिस्तानी नेवी की पनडुब्बी पीएनएस गाजी को हमेशा के लिए समंदर की तलहटी में सुला दिया गया था। जब उसे ढूंढने के लिए डाइविंग ऑपरेशन चलाया गया, तो यह काम नेवी के तत्कालीन आईएनएस निस्तार ने अंजाम दिया था। अब रिटायर हो चुके आईएनएस 'निस्तार' का स्वदेशी संस्करण 55 साल बाद उसी जगह पर मौजूद है, जहां गाजी की कब्र है। नौसेना के मुताबिक, इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में स्वदेशी आईएनएस निस्तार हिस्सा ले रहा है। यह देश का पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल है, जो सबमरीन ऑपरेशन के दौरान गेमचेंजर साबित होगा। इसके नाम की बात करें तो निस्तार संस्कृत शब्द है, जिसका मतलब होता है मुक्ति या उद्धार। गौरतलब है कि भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत को निशाना बनाने आए पीएनएस गाजी को नेवी के आईएनएस राजपूत ने समंदर की गहराई में डूबो दिया था। अब उसी जगह पर स्वदेशी आईएनएस विक्रांत भी मौजूद है। आईएनएस निस्तार की खासियतें- यह भारतीय नौसेना का पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) है, जिसे 18 जुलाई 2025 को शामिल किया गया। नौसेना ने कुल दो डीएसवी लेने का निर्णय लिया, पहला 'निस्तार' और दूसरा 'निपुण' है। दुनिया के सिर्फ चुनिंदा देशों के पास ही सबमरीन रेस्क्यू सपोर्ट वेसल जैसी क्षमता है। पनडुब्बी आपातकाल की स्थिति में यह जहाज़ रेस्क्यू ऑपरेशन सपोर्ट देगा। लंबाई: लगभग 120 मीटर वजन: करीब 10,000 टन गति: लगभग 18 नॉटिकल मील प्रति घंटा स्वदेशी सामग्री: लगभग 80% निर्माण: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड परियोजना अनुबंध: 2018 में साइन; कोविड-19 के कारण डिलीवरी में देरी हुई। क्यों खास है निस्तार 'निस्तार' की खासियत यह है कि यह किसी भी पनडुब्बी आपातकाल के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन को सपोर्ट करेगा। इन वेसलों के जरिए डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (डीएसआरवी) को ले जाया जाएगा, जो गहरे समुद्र में गोता लगाकर सबमरीन से रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देगा। अगर समुद्र में किसी सबमरीन में कोई दिक्कत आ जाती है या वह डूब जाती है, तो ऐसी स्थिति में उसमें फंसे नौसैनिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए इस वेसल का इस्तेमाल किया जाएगा। 'निस्तार' क्लास प्रोजेक्ट के तहत कुल दो डाइविंग सपोर्ट वेसल नेवी में शामिल किए जाने हैं। निस्तार शामिल हो चुका है, जबकि निपुण पर काम जारी है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड इसका निर्माण कर रही है। दोनों वेसलों के निर्माण के लिए साल 2018 में डील साइन की गई थी। डील साइन होने के 36 महीने के अंदर दोनों वेसल नौसेना को मिल जानी चाहिए थीं, लेकिन कोविड के चलते थोड़ी देरी हुई। (इनपुट: आईएएनएस)
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 17, 2026, 19:35 IST
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