Indian Aviation: मार्च तिमाही में 4.37 करोड़ लोगों ने की हवाई यात्रा, जानिए क्या कह रहे आंकड़े

भारतीय विमानन क्षेत्र में साल 2026 की पहली तिमाही के दौरान यात्रियों की संख्या में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की ओर से बुधवार को जारी ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 के बीच घरेलू मार्गों पर 4.37 करोड़ से अधिक यात्रियों ने उड़ान भरी। इस दौरान इंडिगो ने बाजार में अपना शीर्ष स्थान और मजबूत किया है। हालांकि, यात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ उड़ानों में देरी और रद्दीकरण के कारण एयरलाइंस को करोड़ों रुपये का हर्जाना भी देना पड़ा है। हवाई यात्री यातायात: मामूली वृद्धि के संकेत डीजीसीए की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी-मार्च 2026 के दौरान 4.37 करोड़ (437.31 लाख) यात्रियों ने घरेलू यात्रा की, जो पिछले साल की इसी अवधि (431.98 लाख) के मुकाबले 1.23 प्रतिशत अधिक है। केवल मार्च 2026 की बात करें तो कुल हवाई यातायात 1.44 करोड़ रहा। यह आंकड़ा फरवरी के 1.41 करोड़ से तो अधिक है, लेकिन मार्च 2025 में दर्ज किए गए 1.45 करोड़ यात्रियों की तुलना में इसमें 0.87 प्रतिशत की मासिक गिरावट देखी गई है। बाजार हिस्सेदारी का गणित मार्च महीने में विभिन्न एयरलाइंस की बाजार हिस्सेदारी में कुछ अहम बदलाव देखने को मिले: इंडिगो: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी फरवरी के 63.1 प्रतिशत से बढ़कर मार्च में 63.3 प्रतिशत हो गई। एयर इंडिया ग्रुप: इसी अवधि में एयर इंडिया समूह की बाजार हिस्सेदारी 27 प्रतिशत से गिरकर 26.2 प्रतिशत रह गई। आकासा और स्पाइसजेट: आकासा एयर ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत कर ली है, जबकि वित्तीय संकट से जूझ रही स्पाइसजेट की बाजार हिस्सेदारी गिरकर 3.8 प्रतिशत पर आ गई। अलायंस एयर की बाजार हिस्सेदारी 0.6 प्रतिशत रही, जबकि नई एयरलाइन फ्लाई91 (Fly91) 0.2 प्रतिशत पर स्थिर रही। समय पर उड़ान के आंकड़े देश के 10 प्रमुख हवाई अड्डों (जैसे- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद आदि) के लिए समय पर उड़ान भरने यानी ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) के आंकड़े भी जारी किए गए हैं। शीर्ष पर इंडिगो: 88.7 प्रतिशत OTP के साथ इंडिगो इस सूची में सबसे ऊपर रही। वित्तीय वर्ष 2025-26 के 10 महीनों में इंडिगो का OTP सबसे बेहतरीन रहा है। अन्य एयरलाइंस: इसके बाद आकासा एयर (82.6%), एयर इंडिया ग्रुप (78%) और अलायंस एयर (62.9%) का स्थान रहा। सबसे पीछे: स्पाइसजेट का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, जिसका OTP मात्र 43 प्रतिशत दर्ज किया गया। उड़ानों में देरी और कैंसिलेशन का असर मार्च महीने में लगभग 0.92 प्रतिशत उड़ानों में दो घंटे से अधिक की देरी हुई। इसके कारण एयरलाइंस को यात्रियों की सुविधाओं और मुआवजे पर भारी खर्च करना पड़ा: उड़ानों में देरी: देरी के कारण 1.21 लाख यात्री प्रभावित हुए, जिनकी सुविधा (Facilitation) पर एयरलाइंस ने 3.19 करोड़ रुपये खर्च किए। फ्लाइट कैंसिलेशन: उड़ानें रद्द होने से 66,784 यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इनके मुआवजे और सुविधाओं के लिए एयरलाइंस को 93.49 लाख रुपये चुकाने पड़े। बोर्डिंग से इनकार: 951 यात्रियों को बोर्डिंग से मना किए जाने पर भी एयरलाइंस ने मुआवजे के तौर पर 97.42 लाख रुपये खर्च किए। डीजीसीए के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय विमानन बाजार धीरे-धीरे विस्तार कर रहा है और इंडिगो का इस बाजार पर मजबूत नियंत्रण बना हुआ है। हालांकि, इन्फ्रास्ट्रक्चर के दबाव के बीच उड़ानों में देरी और रद्दीकरण जैसी परिचालन चुनौतियां एयरलाइंस के लिए एक बड़ा वित्तीय और प्रबंधकीय मुद्दा बनी हुई हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 29, 2026, 18:05 IST
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