घटता स्टॉक, बढ़ता एक्सपोर्ट: भारतीय पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री के लिए शानदार रहने वाला है FY27

अगर आप सोच रहे हैं कि आजकल सड़कों पर इतनी नई कारें क्यों दिख रही हैं तो इसके पीछे एक ठोस कारण है। हाल ही में रेटिंग एजेंसी ICRA की एक रिपोर्ट आई है जिसके मुताबिक, भारत का पैसेंजर व्हीकल (यात्री वाहन) बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मानसून की आशंका और पश्चिम एशिया के संकट जैसी चिंताओं के बावजूद, भारत में कारों की डिमांड कम नहीं हो रही है। आइए समझते हैं कि ऑटोमोबाइल मार्केट का हाल कैसा है। कारों की बिक्री बढ़ने के 3 मुख्य कारण भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में आई इस शानदार तेजी के पीछे तीन मुख्य कारक काम कर रहे हैं। सबसे पहले, कारों पर घटी जीएसटी दरों (टैक्स) ने ग्राहकों को सीधा आर्थिक फायदा पहुंचाया है, जिससे खरीदारी करना आसान हो गया है। इसके साथ ही, इस बार गर्मियों में शादियों का सीजन लंबा चलने के कारण कारों की मांग में भारी उछाल देखा गया है। इन सबके अलावा, बाजार में लॉन्च हुए एक से बढ़कर एक नए और शानदार मॉडल्स ने ग्राहकों को खूब आकर्षित किया है, जिसके चलते लोग नई गाड़ियां खरीदने के लिए उत्साहित दिख रहे हैं। अप्रैल महीने में कैसा रहा कारों का बाजार अप्रैल के महीने में कारों के बाजार ने होलसेल और रिटेल, दोनों ही मोर्चों पर शानदार रफ्तार पकड़ी है। कंपनियों से डीलरों तक पहुंचने वाली होलसेल बिक्री पिछले साल की तुलना में 25% उछलकर 4.4 लाख यूनिट्स के आंकड़े को पार कर गई है, जो यह दर्शाता है कि कंपनियां बढ़ती हुई घरेलू मांग को पूरा करने के लिए लगातार अपना प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं। वहीं, डीलरों से ग्राहकों तक होने वाली रिटेल बिक्री में भी सालाना आधार पर 16% की अच्छी-खासी बढ़त देखी गई है। हालांकि, मार्च 2026 की तुलना में अप्रैल में रिटेल बिक्री में मामूली गिरावट जरूर रही, जिसका मुख्य कारण यह है कि वित्तीय वर्ष के अंत में कंपनियां अपना पुराना स्टॉक निकालने के लिए भारी डिस्काउंट देती हैं, जिससे मार्च में बिक्री का आंकड़ा काफी ऊपर चला जाता है। शोरूम में नहीं रुक रही गाड़ियां (इन्वेंट्री की स्थिति) कारों की बंपर बिक्री का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शोरूम में गाड़ियां आते ही तेजी से बिक रही हैं, जिसके चलते डीलर्स का स्टॉक पहले के मुकाबले बहुत जल्दी क्लियर हो रहा है। इन्वेंट्री की स्थिति पर नजर डालें तो अप्रैल 2025 में डीलर्स के पास औसतन 50 दिनों का स्टॉक मौजूद था, जो सितंबर 2025 में बढ़कर 60 दिनों तक पहुंच गया था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और अप्रैल 2026 में यह स्टॉक घटकर मात्र 28 से 30 दिनों का रह गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बाजार में वाहनों की मांग बहुत मजबूत बनी हुई है। विदेशों में भी बढ़ी भारतीय कारों की डिमांड सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि भारतीय कारों का जलवा विदेशों में भी है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में पैसेंजर वाहनों के निर्यात में 13% की अच्छी खासी बढ़त दर्ज की गई है। यह दिखाता है कि भारतीय कार निर्माता कंपनियां अब ग्लोबल मार्केट में भी तेजी से अपनी सप्लाई बढ़ा रही हैं। आगे का क्या है अनुमान ICRA का मानना है कि बाजार में कारों की डिमांड आगे भी बनी रहेगी। इसी को देखते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) में भारतीय पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री के 4.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 22, 2026, 12:20 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




घटता स्टॉक, बढ़ता एक्सपोर्ट: भारतीय पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री के लिए शानदार रहने वाला है FY27 #Automobiles #National #Icra #PassengerVehicles #AutoIndustry #CarSales #SubahSamachar