गर्मी, ग्रिड और संकेत: 252 गीगावाट की मांग ने दी चेतावनी, अब स्थायी ऊर्जा समाधान की जरूरत
बीते हफ्ते शुक्रवार के दिन देश में बिजली की अधिकतम मांग का 252 गीगावाट के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचना महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि देश के ऊर्जा तंत्र के सम्मुख खड़ी एक बड़ी संरचनात्मक चुनौती का संकेत है। दरअसल गर्मी की लहरों ने देश के विभिन्न राज्यों को जकड़ना शुरू कर दिया है। लिहाजा, घरेलू व वाणिज्यक क्षेत्रों में एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों की होड़ से बिजली ग्रिड पर अभूतपूर्व दबाव पड़ा है। इसी का नतीजा है कि एक ही दिन के भीतर बिजली की मांग का आंकड़ा 240 से 252 गीगावाट तक पहुंच गया, जिसकी पुष्टि ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया की रिपोर्ट से भी होती है। यहां चिंता सिर्फ इस बात की नहीं है कि मांग बढ़ रही है, बल्कि इसकी भी है कि मांग का यह उछाल अनुमान से पहले और अधिक तीव्रता के साथ सामने आ रहा है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष अप्रैल में बिजली की अधिकतम मांग 235 गीगावाट पर और जून में यह वर्ष के उच्चतम स्तर यानी 242.8 गीगावाट पर पहुंची थी। लेकिन, इस बार गर्मी ने समय से पहले दस्तक दी है और इसके साथ ही देश की बिजली व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा भी शुरू हो गई है। हालांकि वर्तमान ऊर्जा संकट केवल गर्मी का ही नहीं, बल्कि बढ़ती शहरी आबादी, बदलती जीवनशैली और दशकों पुरानी बिजली वितरण प्रणाली का मिला-जुला नतीजा है। मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ने के साथ ही एयर कंडीशनर अब विलासिता नहीं, बल्कि एक सामान्य जरूरत बन चुके हैं। जब करोड़ों उपकरण एक साथ चलते हैं, तब ग्रिड पर दबाव स्वाभाविक ही इतना बढ़ जाता है कि ट्रिपिंग की घटनाएं आम होने लगती हैं। यहीं से ऊर्जा संकट का सामाजिक पहलू उभरता है। संपन्न वर्ग तो एसी, फ्रिज, कूलर, इन्वर्टर के सहारे गर्मी से निपट लेता है, लेकिन झुग्गियों में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर, किसान और दस मिनट में घर पर सामान पहुंचाने वाले युवक बगैर किसी राहत के इस तपिश को झेलने को मजबूर हैं। हैरानी तो यह है कि हर वर्ष यह संकट आने पर भी नीति-नियंता तदर्थ मोड में ही अधिक दिखते हैं, जबकि जरूरत है एक दीर्घकालिक नीति की। ग्रिडों के आधुनिकीकरण के लिए ठोस निवेश की भी जरूरत है। प्रधानमंत्री रूफटॉप सोलर योजना के तहत अब तक करीब दस लाख घरों में सोलर ऊर्जा पैनल लगाए गए हैं, जिसमें और तेजी लाने की जरूरत है, क्योंकि अगर हर घर अपनी जरूरत की 30-40 फीसदी बिजली खुद पैदा करे, तो राष्ट्रीय ग्रिड पर दबाव कम हो सकता है। राष्ट्रीय ऊर्जा ढांचे को वर्तमान व भविष्य की जरूरतों के आधार पर ढाला जाए, तो यह बिजली के बहुआयामी संकट के स्थायी समाधान की दिशा में अहम कदम होगा।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 27, 2026, 04:15 IST
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