राजस्थान: केकड़ी में दीपावली पर खेली जाती है 'अंगारों की होली', जलते पटाखे फेंकते हैं लोग; पुलिस ने दी चेतावनी
दीपावली का त्योहार रोशनी, खुशियों और आपसी मेल-मिलाप का प्रतीक है, लेकिन राजस्थान के केकड़ी शहर में इस पर्व के दौरान एक खतरनाक नजारा देखने को मिलता है। यहां दीपावली और गोवर्धन पूजा के अवसर पर कुछ लोग एक-दूसरे पर जलते हुए पटाखे फेंकते हैं। इस गतिविधि को स्थानीय स्तर पर 'अंगारों की होली' कहा जाता है। करीब 35-40 साल से जारी इस चलन के कारण बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है और व्यापारी दुकानें बंद करने को मजबूर हो जाते हैं। इस बार त्योहार से पहले ही कई मोहल्लों में पटाखे फेंकने की घटनाएं सामने आई हैं। घंटाघर और बाजारों से शुरू होता है पटाखों का खतरनाक खेल केकड़ी में दीपावली और उसके अगले दिन गोवर्धन पूजा के दौरान शहर के प्रमुख बाजारों में पटाखेबाजी का सिलसिला शुरू हो जाता है। घंटाघर और उससे जुड़े बाजारों में लोग चौराहों और नुक्कड़ों पर समूह बनाकर खड़े होते हैं। इसके बाद एक-दूसरे पर जलते हुए फव्वारेदार पटाखे फेंके जाते हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार, इस गतिविधि में गंगा-जमना और सीता-गीता नाम के पटाखों का इस्तेमाल किया जाता है। ये पटाखे पहले अनार की तरह फव्वारा छोड़ते हैं और फिर तेज धमाके के साथ फटते हैं। दोपहर से शुरू होने वाला यह सिलसिला देर रात तक चलता है। इस दौरान कई लोग झुलस जाते हैं और आग लगने की घटनाएं भी होती हैं। बाजारों में दुकानदार अपनी सुरक्षा के लिए समय से पहले दुकानें बंद कर देते हैं। पटाखों के धुएं से गलियां और रास्ते भी प्रभावित होते हैं। 35-40 साल से चली आ रही है यह विकृत परंपरा स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस गतिविधि की शुरुआत कब और कैसे हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं है। बताया जाता है कि पहले बैल पूजन और घास भैरू की सवारी के दौरान बैलों को बिदकाने के लिए पटाखे फेंके जाते थे। धीरे-धीरे इसका स्वरूप बदल गया और कुछ युवकों ने एक-दूसरे पर जलते पटाखे फेंकना शुरू कर दिया। अब यह गतिविधि दीपावली और गोवर्धन पूजा के दौरान शहर की शांति और सुरक्षा के लिए चुनौती बन जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस दौरान जान-माल के नुकसान का खतरा बना रहता है। घास भैरू की सवारी से जुड़ी है शहर की धार्मिक परंपरा केकड़ी में गोवर्धन पूजा के दिन घास भैरू की सवारी निकाली जाती है। शहर के मुख्य सदर बाजार स्थित गणेश प्याऊ चौराहे पर घास भैरू का शिलाखंड स्थापित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसमें 36 करोड़ देवी-देवताओं का निवास है। परंपरा के मुताबिक, पहले इस शिलाखंड को बैलों की मदद से खींचकर शहर की परिक्रमा कराई जाती थी। मान्यता है कि इससे क्षेत्र में सालभर धन-धान्य की कमी नहीं रहती। अब बैलों की संख्या कम होने के कारण लकड़ी के पट्टे पर शिलाखंड को रखकर लोगों का समूह इसे खींचता है और नगर परिक्रमा कराता है। दीपावली से दस दिन पहले ही कई मोहल्लों में फेंके पटाखे इस बार दीपावली से पहले ही केकड़ी के भेरू गेट, रेगर मोहल्ला, कुम्हार मोहल्ला और कसाई मोहल्ला क्षेत्रों में युवकों के समूहों ने एक-दूसरे पर जलते पटाखे फेंके। शुक्रवार को हुई इस गतिविधि से स्थानीय लोग भयभीत हो गए। मोहल्लेवासियों ने सवाल उठाया कि जब पटाखा विक्रेताओं को अभी लाइसेंस जारी नहीं हुए हैं, तो इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित और खतरनाक पटाखे युवकों तक कैसे पहुंच रहे हैं। लोगों ने इस मामले में उपखंड अधिकारी, केकड़ी थानाधिकारी और अजमेर जिला कलेक्टर को शिकायत भेजी है। पुलिस ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी केकड़ी शहर थाना परिसर में आयोजित सीएलजी और शांति समिति की बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मील ने स्पष्ट किया कि दीपावली, बैल पूजन और घास भैरू की सवारी के दौरान परंपरा की आड़ में पटाखे फेंकने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि शहर में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिकता है। किसी भी तरह का उपद्रव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस बाजारों का दौरा कर लोगों को समझाइश भी करेगी। बैठक में डीएसपी मनोज कुमार गुप्ता और थानाधिकारी जगदीश प्रसाद चौधरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 02, 2026, 02:28 IST
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