UP: 'जीवन बेकार है', तेल मिल मालिक ने भी कहे थे ये शब्द, फिर दे दी जान; नजरअंदाज न करें ये संकेत
मानसिक तनाव और अवसाद किस तरह धीरे-धीरे व्यक्ति को अंदर से तोड़ देता है, इसका ताजा उदाहरण आगरा में सामने आया है। थाना सिकंदरा क्षेत्र के शास्त्रीपुरम में तेल मिल मालिक विश्वजीत सिंह रजावत (23) ने परिजन से वीडियो कॉल पर बात करने के बाद खुद को तमंचे से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उसने कॉल पर कहा था कि अब जीने का मन नहीं है। ये भी पढ़ें -UP:रजावत हाउस में चीखें, मातम और बेटे को खोने का दर्द; तेल मिल मालिक की आत्महत्या से बिखर गया पूरा परिवार मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि जब कोई व्यक्ति कहे कि “जीवन बेकार है, इससे भला तो मर जाएं”, तो इसे हल्के में लेना बेहद खतरनाक हो सकता है। यह स्थिति भावनात्मक रोग यानी उदासी रोग से जुड़ी होती है, जिसमें व्यक्ति खुद को बेकार और अकेला महसूस करने लगता है। ये भी पढ़ें - UP:'पापा आई लव यू' वीडियो कॉल किया, फिर तेल मिल मालिक ने खुद को मारी गोली, तस्वीरें आईं सामने प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि उदासी रोग भावनात्मक समस्याओं से जुड़ा हुआ है। जब मरीज जीवन से निराश होकर मरने की बात करे तो तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाएं। टोल फ्री नंबर 14416 पर 24 घंटे परामर्श भी ले सकते हैं। ब्यूरो परिजन ऐसा करें: - मरीज को जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करें। - मरीज को अकेला न छोड़ें। उसके साथ समय बिताएं। - मरीज की परेशानी पर मजाक न बनाएं, कटाक्ष न करें। - मरीज का विशेषज्ञ से इलाज और काउंसलिंग कराएं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 09, 2026, 10:20 IST
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