Holi: त्योहारों को मनाने का रंग-ढंग बदला, नहीं बदली कुल्लू में भगवान रघुनाथ की होली, जानें इतिहास

आधुनिकता के दौर में उत्सवों और त्योहारों का मनाने का रंग, ढंग बदल गया है, लेकिन नहीं बदला तो वह देवभूमि में भगवान रघुनाथ की होली परंपरा। आज भी रघुनाथपुर में 366 साल पुरानी होली परंपरा को कुल्लू में निभाई जा रही है। यहां वैरागी समुदाय के लोग सैकडों वर्षोंसे ब्रज की होली परंपरा को सहेजे हुए हैं। हालांकि कुल्लू जिला में भगवान रघुनाथ को आयोध्य से 1650 ई. में लाया गया था। लेकिन सुल्तानपुर में रघुनाथ 1660 को विराजे थे। तब से लेकर अयोध्या की तर्ज पर यहां भी होली उत्सव की परंपरा का भलि भांति निर्वहन किया जा रहा है। जिला में वसंत पंचमी से ब्रज की होली शुरू होती और 40 दिन तक इसे धूमधाम से मनाया जाता है। शहर में वैरागी समुदाय के लोग टोलियां बनाकर ब्रज भाषा में होली के गीत गाते हैं। खास बात है कि रघुनाथ की नगरी में होली पर्व को एक दिन पहले मनाया जाता है। होलिका दहन के दूसरे दिन भगवान रघुनाथ मंदिर में विशेष कार्यक्रम में शामिल होते हैं। इसके साथ होली उत्सव का समापन होता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 02, 2026, 22:48 IST
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