Ayodhya News: अश्वमेघ महायज्ञ में सुनाए रामचरितमानस के मार्मिक प्रसंग
अयोध्या। सरयू तट से सटे बालूघाट पर चल रहे सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ में कोलकाता से आए सदगुरु महाराज के कृपा पात्र बालाचार्य बैरशवरानंद ने रामचरितमानस के एक अत्यंत मार्मिक प्रसंग सुनाए। मां सीता पर प्रहार करने वाले कागभुषुण्डि के चरित्र पर गूढ़ प्रकाश डाला। उनका प्रवचन केवल कथा नहीं था, बल्कि भक्ति, अहंकार, करुणा और प्रभु-कृपा का जीवंत दर्शन था।बालाचार्य ने कहा कि कागभुषुण्डि कोई साधारण पात्र नहीं, वह आत्मा की यात्रा का प्रतीक है। वह हमें बताता है कि भक्ति बिना विनय के अपूर्ण है और अहंकार चाहे जितना सूक्ष्म हो, पतन का कारण बनता है। बालाचार्य ने स्पष्ट किया कि उस काग का यह कृत्य अपराध से अधिक अहंकार का परिणाम था। कहा कि जहां न्याय समाप्त होता है, वहीं करुणा आरंभ होती है। मां सीता ने उस काग के लिए श्रीराम से प्रार्थना की। प्रभु ने दंड को समाप्त नहीं किया, बल्कि दया से परिष्कृत किया। काग की एक आंख गई, पर उसका जीवन बचा और उसे भक्ति का वरदान मिला। यही काग आगे चलकर कागभुषुण्डि कहलाया, जो नारदजी जैसे महर्षियों को रामकथा का उपदेश देने वाला महान भक्त बना। बालाचार्य ने भावुक स्वर में कहा कि जिसने माता पर प्रहार किया, वही करुणा पाकर कथा का अमर वक्ता बन गया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 09, 2026, 21:42 IST
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