Noida News: उत्तराखंड निवासी दंपती बच्चों को पढ़ाने की आड़ में कराते थे प्रार्थना-सभा

उत्तराखंड निवासी दंपती बच्चों को पढ़ाने की आड़ में कराते थे प्रार्थना-सभा सेक्टर-36 के बी-224 मकान में धर्मांंतरण गिरोह का मामलारविवार को बाहर से बुलाए जाते थे गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारफंडिंग, किताबों की सप्लाई और अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी पुलिसमाई सिटी रिपोर्टरग्रेटर नोएडा। सेक्टर-36 स्थित बी-224 मकान में सामने आए धर्मांतरण गिरोह के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो रहे हैं। बाहर से देखने पर यह मकान पुराना और जर्जर नजर आता है लेकिन भीतर का नजारा बिल्कुल अलग है। मकान के बेसमेंट समेत दोनों मंजिलों पर बने कमरे आधुनिक और लग्जरी सुविधाओं से लैस हैं। दीवारों से लेकर फर्श तक हर कोना पूरी तरह डेंट-पेंट किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अंदर की गतिविधियां लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से संचालित की जा रही थीं। पुलिस ने सोमवार को सेक्टर में पहुंचकर यहां के निवासियों से बात करने के बाद जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। जांच में सामने आया है कि रात के समय एक कार से कार्टूनों में भरकर ईसाई धर्म से संबंधित धार्मिक पुस्तकें इस मकान तक पहुंचाई जाती थीं। इन पुस्तकों को प्रार्थना-सभा में आने वाले लोगों और बच्चों में मुफ्त वितरित किया जाता था। पुस्तकें पाने वाले लोगों को ईसाई धर्म के प्रति प्रेरित किया जाता था और नियमित रूप से सभाओं में शामिल होने के लिए कहा जाता था। इस पूरे नेटवर्क में उत्तराखंड निवासी एक दंपती की भूमिका अहम बताई जा रही है। यह दंपती बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ प्रार्थना-सभाओं का आयोजन भी कराता था। बेसमेंट में बने बड़े हाॅल में बच्चों की पढ़ाई और रविवार को प्रार्थना-सभा आयोजित होती थी। जिसमें महिला का नाम रोजी बताया जा रहा है। दोनों फिलहाल बिरौंडी क्षेत्र में किराये के मकान में रहते थे लेकिन मामले के सामने आने के बाद से वे लापता हैं। पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है। मकान बीना एस्टर इब्राहिम पत्नी आनंद बारगेस इब्राहिम के नाम दर्ज है। धार्मिक पुस्तकों को लाने वाली कार के नंबर की जांच कराई जा रही है। सेक्टर में आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि कार और उसमें शामिल लोगों की पहचान की जा सके। जल्द ही मकान मालिक दंपती को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया जा सकता है। सेक्टरवासियों को घर में जाने की नहीं थी इजाजत आसपास के लोगों ने पुलिस को बताया कि मकान में सोमवार से शनिवार तक दोपहर करीब तीन बजे से शाम पांच बजे तक बच्चों को पढ़ाने के नाम पर बुलाया जाता था। इनमें अधिकतर बच्चे आसपास की झुग्गियों और अन्य सेक्टरों से आते थे। बच्चों के लिए चाय-नाश्ते की भी व्यवस्था रहती थी। वहीं, हर रविवार को प्रार्थना-सभा आयोजित की जाती थी, जिसमें बाहर से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बुलाया जाता था। रविवार को मकान के बाहर गाड़ियों की भीड़ लग जाती थी लेकिन पड़ोसियों को अंदर जाने की अनुमति नहीं होती थी। अंदर जाने वाले बच्चों और लोगों को धार्मिक पुस्तकें दी जाती थीं और उन्हें प्रार्थना-सभा में नियमित शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाता था। एक महिला ने बताया कि उसका बच्चा पिछले दो वर्षों से वहां पढ़ने जाता था। पढ़ाई के दौरान हिंदी-अंग्रेजी और गणित सिखाया जाता था, साथ ही ईसाई धर्म की किताबें दी जाती थीं और प्रार्थना में शामिल होने को कहा जाता था। चार माह तक बंद रहीं गतिविधियांसेक्टर के लोगों ने बताया कि वर्ष 2022 में मकान में आने-जाने वालों की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर उन्होंने इसका विरोध किया था। उस समय करीब चार माह तक बच्चों की आवाजाही और प्रार्थना-सभाएं बंद रहीं। बाद में आरोपियों ने सेक्टर के जिम्मेदार लोगों से संपर्क कर दोबारा गतिविधियां शुरू कर दीं। विरोध करने पर कहा गया कि यहां गरीब बच्चों को पढ़ाया जाता है, इसमें आपत्ति की क्या बात है। इसके बाद लोग शांत हो गए और गतिविधियां फिर से चलने लगीं। आरोपियों को भेजा जेलपुलिस ने सोमवार को राजस्थान के बांसवाड़ा निवासी सुरेश कुमार और ऐच्छर निवासी चंदकिरण को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मकान के कमरों से बड़ी संख्या में धार्मिक पुस्तकें और अन्य सामग्री बरामद हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने स्वयं या किसी अन्य का धर्मांतरण कराने से इन्कार किया है। उनका कहना है कि वह केवल ईसाई धर्म से प्रेरित होकर प्रार्थना-सभाओं में शामिल होते थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, फंडिंग के स्रोत, किताबों की सप्लाई चेन और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।वर्जन अभी तक की जांच में यहां आने वाले किसी भी व्यक्ति के धर्मांतरण की पुष्टि नहीं हुई है। प्रार्थना-सभा में शामिल होने वाले लोगों ने स्वीकार किया है कि उन्हें ईसाई धर्म के प्रति प्रेरित किया जाता था और पढ़ने के लिए निशुल्क धार्मिक पुस्तकें दी जाती थीं। बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों और मकान मालिक की तलाश की जा रही है। -विनोद कुमार, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 09, 2026, 18:02 IST
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