गुरुमंत्र : पढ़ाई के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ भी जरूरी

विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि अच्छे नागरिक बनाने की पहली पाठशाला भी है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उनमें समाज, पर्यावरण और देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है। यदि बचपन से ही सामाजिक दायित्वों की समझ दी जाए तो वे भविष्य में संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनते हैं। इसी सोच के साथ हमारे विद्यालय में बालक और बालिकाओं की एक जागरूकता टीम बनाई गई है। यह टीम शिक्षकों के मार्गदर्शन में घरेलू हिंसा, बाल विवाह, छेड़छाड़, आत्मरक्षा, स्वच्छता और सामाजिक कुरीतियों जैसे विषयों पर जनजागरूकता अभियान चलाती है। बच्चे नुक्कड़ नाटक, संवाद और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से समाज तक सकारात्मक संदेश पहुंचाते हैं। इससे उनमें नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सामाजिक सरोकार भी विकसित होते हैं। मेरा मानना है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। व्यवहारिक ज्ञान, नैतिक मूल्य और संवेदनशीलता भी बच्चों के व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विद्यालय का वातावरण ऐसा होना चाहिए, जहां हर बच्चा अपनी बात बिना किसी झिझक के शिक्षकों से साझा कर सके और स्वयं को सुरक्षित महसूस करे। जब शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक चेतना जुड़ती है, तभी विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव होता है।- ज्योतिर्मयी पांडेय, प्रधानाध्यापिका, कंपोजिट विद्यालय मुर्शदपुर, दनकौर

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 08, 2026, 19:00 IST
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