GTRI: सोने-चांदी पर आयात शुल्क में भारी इजाफा; दुबई के रास्ते बढ़ेगा आयात, समझें मुनाफे का पूरा गणित

भारत सरकार की ओर सेसोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के बाद सर्राफा बाजार का समीकरणपूरी तरह से बदल गया है। इस भारी बढ़ोतरी के बाद मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत दुबई से होने वाले आयात में बड़ी वृद्धि देखने को मिल सकती है। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, इस नए टैरिफ ढांचे ने भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के रास्ते होने वाले आयात को गहराई सेप्रभावित किया है। आयात शुल्क में बदलाव का क्या होगा असर पुरानी व्यवस्था के तहत सोने और चांदी पर 5 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी (बीसीडी) और 1 प्रतिशत एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (एआईडीसी) लगता था, जिससे कुल लेवी 6 प्रतिशत थी। इसमें 3 प्रतिशत इंटीग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) जोड़ने के बाद प्रभावी शुल्क 9.18 प्रतिशत बैठता था। लेकिन नए संशोधित ढांचे में सरकार ने बीसीडी को दोगुना कर 10 प्रतिशत और एआईडीसी को पांच गुना बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप कुल सीमा शुल्क 6 प्रतिशत से सीधे 15 प्रतिशत हो गया है, और आईजीएसटी सहित प्रभावी आयात शुल्क 9.18 प्रतिशत से उछलकर 18.45 प्रतिशत पर पहुंच गया है। दुबई के रास्ते आयात में क्यों आएगी तेजी भारत ने एक टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) प्रणाली के तहत दुबई से सामान्य मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (एमएफएन) दर से एक प्रतिशत कम टैरिफ पर सोने के आयात की अनुमति दी थी। यह कोटा 2022 में सालाना 120 टन से शुरू हुआ था और 2027 तक इसे 200 टन तक बढ़ाया जाना है, जो भारत के सालाना स्वर्ण आयात का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है। जीटीआरआई के अनुसार, नई व्यवस्था में प्रभावी शुल्क 15 प्रतिशत होने से यूएई कोटे के तहत आने वाला सोना 14 प्रतिशत शुल्क पर भारत में प्रवेश करेगा। टैरिफ का यह अंतर वैश्विक बुलियन को दुबई के रास्ते भारत लाने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है, भले ही यूएई खुद सोने या चांदी का खनन नहीं करता है। चांदी के आयात में बड़े मुनाफे की संभावना कैसे सीईपीए के तहत, भारत मई 2022 से शुरू होने वाली दस साल की अवधि में चांदी पर आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य करने पर भी सहमत हुआ था। वर्तमान में यूएई से चांदी के आयात पर रियायती शुल्क 7 प्रतिशत है। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि भारत द्वारा सामान्य टैरिफ को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने से अब यह ड्यूटी अंतर 8 प्रतिशत अंकों का हो गया है। यह अंतर दुबई के रास्ते होने वाले आयात के लिए एक बड़ा आर्बिट्रेज (मुनाफा कमाने का) अवसर पैदा कर रहा है और यह मार्जिन 2031 तक हर साल तब तक और चौड़ा होगा जब तक सीईपीए टैरिफ शून्य नहीं हो जाता। बढ़ते आयात के आंकड़ों के बीच किस बात की चिंता यह नीतिगत कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कीमती धातुओं के आयात में भारी उछाल दर्ज किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में, भारत ने लगभग 72 अरब डॉलर मूल्य के सोने का आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में चांदी के आयात में भी सालाना आधार पर 150 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि दर्ज की गई है। इस बीच, जीटीआरआई ने वित्त मंत्रालय से इन टैरिफ बदलावों से जुड़ी अधिसूचनाओं की भाषा को सरल बनाने का भी आग्रह किया है। थिंक टैंक के अनुसार, वर्तमान प्रारूप आयातकों और वकीलों को पिछले 26 वर्षों में जारी सीमा शुल्क अधिसूचनाओं को खंगालने के लिए मजबूर करता है, जिससे वास्तविक देय शुल्क का निर्धारण करना बेहद जटिल हो गया है। आयात शुल्क में हुई इस वृद्धि ने एक तरफ जहां आयात को महंगा किया है, वहीं दूसरी तरफ भारत-यूएई व्यापार समझौते के तहत दुबई के रास्ते होने वाले व्यापार के लिए एक बड़ा और आकर्षक अवसर भी खोल दिया है। सरकार और नीति निर्माताओं के लिए आने वाले समय में इन बढ़ते आयातों की आर्थिक निगरानी और कस्टम नियमों का सरलीकरण एक प्रमुख प्राथमिकता होनी चाहिए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 13, 2026, 11:21 IST
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