'ग्लास स्किन' का ट्रेंड या त्वचा से खिलवाड़?: युवतियों में एक्ने की समस्या, विशेषज्ञ ने बताया कैसे करें देखभाल

सोशल मीडिया पर इन दिनों ग्लास स्किन यानी बेहद साफ, चमकदार और बेदाग त्वचा का ट्रेंड किशोरों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गेट रेडी विद मी जैसे वीडियो में कई तरह के सीरम, टोनर, मास्क, एक्सफोलिएटर और दूसरे स्किनकेयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करते दिखाए जाते हैं। लेकिन त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरों को इतनी लंबी स्किनकेयर रूटीन की जरूरत नहीं होती। उल्टा, जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से त्वचा में जलन और दूसरी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 से 18 साल की उम्र के 80 प्रतिशत से अधिक किशोरों को किशोरावस्था के दौरान एक्ने यानी मुंहासों की समस्या होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे असामान्य मानने या सोशल मीडिया पर दिखने वाली बेदाग त्वचा को सामान्य मानक समझने के बजाय यह समझना जरूरी है कि किशोरावस्था में मुंहासे और त्वचा में बदलाव आम हैं। ग्लास स्किन हर किसी के लिए वास्तविक लक्ष्य नहीं कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जोनाथन केंटली के मुताबिक सोशल मीडिया का सबसे चिंताजनक प्रभाव किशोरों में अवास्तविक सौंदर्य मानकों को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हजारों मरीज देखे हैं, लेकिन उन्हें किसी की ऐसी त्वचा नहीं मिली जिसे वास्तव में ग्लास स्किन कहा जा सके। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली कई तस्वीरें फिल्टर और एडिटिंग से बदली हुई होती हैं। किशोरों की त्वचा पर पोर्स, ब्लैकहेड्स, दाने, लालिमा, पिग्मेंटेशन और पुराने मुंहासों के निशान होना सामान्य हो सकता है। इसलिए हर दाग या पोर्स को किसी ऐसी समस्या की तरह देखना जरूरी नहीं है जिसे तुरंत किसी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट से ठीक किया जाए। किशोरों के लिए कैसी हो स्किनकेयर रूटीन कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जैनब लफ्ताह के अनुसार किशोरों के लिए स्किनकेयर को जितना संभव हो उतना आसान रखना चाहिए। सामान्य तौर पर तीन चीजें पर्याप्त आधार हो सकती हैं हल्का क्लेंजर, खुशबू रहित मॉइस्चराइजर और एसपीएफ 30 या उससे अधिक वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन।त्वचा को बार-बार एक्सफोलिएट करना या एक साथ कई मजबूत एक्टिव इंग्रीडिएंट इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार किशोरों में त्वचा की सुरक्षात्मक परत अभी बदलावों से गुजर रही होती है। ऐसे में बहुत अधिक प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से यह बैरियर कमजोर हो सकता है। ज्यादा सीरम और एक्टिव से समस्या बढ़ सकती है सोशल मीडिया से प्रभावित होकर कई किशोर वयस्कों के लिए बनाए गए स्किनकेयर रूटीन को अपनाने लगे हैं। इसमें कई तरह के सीरम, टोनर, मास्क, एसिड और रेटिनॉयड शामिल हो सकते हैं। डॉ. लफ्ताह के मुताबिक इन प्रोडक्ट्स का अनावश्यक इस्तेमाल त्वचा के बैरियर को प्रभावित कर सकता है और इससे त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। डॉ. केंटली ने किशोरों में पेरिओरल डर्मेटाइटिस जैसी समस्या में वृद्धि की बात भी कही है, जिसका संबंध त्वचा की सुरक्षात्मक परत को प्रभावित करने वाले कुछ उत्पादों के अत्यधिक इस्तेमाल से हो सकता है। एक्ने में सैलिसिलिक एसिड कब मदद कर सकता है किशोरावस्था में हार्मोनल बदलावों के कारण त्वचा में तेल का उत्पादन बढ़ सकता है। इससे बालों के रोम बंद होने और सूजन के कारण ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और मुंहासे हो सकते हैं।सैलिसिलिक एसिड तेल से भरे पोर्स में जाकर सीबम और मृत त्वचा कोशिकाओं के जमाव को कम करने में मदद कर सकता है और ऑयली या एक्ने-प्रोन त्वचा वाले कुछ किशोरों के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल त्वचा में रूखापन और जलन पैदा कर सकता है। मुंहासों को दबाने की गलती न करें विशेषज्ञ मुंहासों को बार-बार छूने, दबाने या फोड़ने से बचने की सलाह देते हैं। ऐसा करने से सूजन बढ़ सकती है और संक्रमण या त्वचा के भीतर सूजन गहराई तक जाने का जोखिम बढ़ सकता है। इससे बाद में दाग और त्वचा के रंग में बदलाव भी हो सकता है।मुंहासों पर इस्तेमाल होने वाले हाइड्रोकॉलॉयड पैच कुछ सतही दानों से निकलने वाले तरल को सोखने और उन्हें बार-बार छूने से रोकने में मदद कर सकते हैं। नींद और खानपान का भी असर त्वचा की समस्या को केवल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट से जोड़कर देखना सही नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पर्याप्त नींद और संतुलित खानपान भी महत्वपूर्ण हैं। नींद की कमी से कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है जो कुछ लोगों में मुंहासों को बढ़ाने से जुड़ा है।कुछ अध्ययनों में ज्यादा शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन तथा व्हे प्रोटीन के सेवन को भी कुछ लोगों में एक्ने फ्लेयर-अप से जोड़ा गया है। हालांकि, त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और किसी खास भोजन का प्रभाव व्यक्ति-दर-व्यक्ति बदल सकता है। लड़कों को शेविंग में भी सावधानी जरूरी किशोर लड़कों में एंड्रोजन हार्मोन के प्रभाव के कारण त्वचा अपेक्षाकृत ज्यादा ऑयली हो सकती है और मुंहासे अधिक हो सकते हैं। इस उम्र में शेविंग शुरू होने के बाद गलत तकनीक से त्वचा में जलन और फॉलिकुलाइटिस की समस्या भी हो सकती है।त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार शेविंग से पहले त्वचा को गर्म पानी या शॉवर से तैयार करना, शेविंग फोम जैसे लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करना और बालों की दिशा में शेव करना त्वचा पर अनावश्यक जलन कम करने में मदद कर सकता है। कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए अगर मुंहासे लगातार बने हुए हैं, बेहद दर्दनाक हैं, गांठदार या सिस्टिक हैं अथवा त्वचा पर स्थायी दाग पड़ रहे हैं, तो सोशल मीडिया के सुझावों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर या त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। गंभीर एक्ने में डॉक्टर की निगरानी में प्रिस्क्रिप्शन उपचार की जरूरत पड़ सकती है।एक्सपर्ट्स की सलाह का सार यही है कि किशोरों के लिए स्किनकेयर का मतलब ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्ट इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि त्वचा की जरूरत के मुताबिक सरल और नियमित देखभाल करना है। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली परफेक्ट त्वचा को सामान्य मानक मानने के बजाय किशोरों को यह समझना जरूरी है कि पोर्स, मुंहासे और त्वचा में होने वाले सामान्य बदलाव किशोरावस्था का हिस्सा हो सकते हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 24, 2026, 11:32 IST
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