दावों का निकला दम, सूख गए पौधे बचे सिर्फ गड्ढे

दावों का निकला दम, सूख गए पौधे बचे सिर्फ गड्ढेगाजियाबाद। शहर को हरा-भरा बनाने के दावों का एक साल में ही दम निकल गया। नगर निगम, जीडीए और अन्य विभागों की ओर से लगाए गए पौधे देखभाल न किए जाने की वजह से सूख गए। अब एक बार फिर नगर निगम, नगर पालिकाओं और जीडीए समेत अन्य विभागों को बरसात के सीजन में पौधे लगाने का लक्ष्य दे दिया गया है। कुल 10.95 लाख पौधों में से नगर निगम को सबसे ज्यादा 1.15 लाख लगाने हैं।सभी सरकारी विभाग हर साल पौधे लगाने पर मोटी रकम खर्च करते हैं। नगर निगम ने बीते दो साल में साईं उपवन के पीछे करीब 15 हजार से ज्यादा पौधे लगाने का दावा किया लेकिन अब यह सभी पौधे सूख चुके हैं। जीडीए की ओर से 2015 और 2016 में 2.05 करोड़ रुपये खर्च कर ठाकुरद्वारा से डासना फ्लाईओवर तक और राजनगर से विवेकानंद नगर, कविनगर होते हुए एएलटी चौराहे तक ग्रीन बेल्ट विकसित कराई थी। इसमें सुबह की सैर करने के लिए कच्चा फुटपाथ भी बनाया गया था। अब इसमें सिंचाई तक नहीं हो रही। रखरखाव न होने की वजह से पूरी ग्रीन बेल्ट उजड़ गई है। यही नहीं, एमएमजी अस्पताल के पास पुल के नीचे और जल निगम रोड के डिवाइडर व रोड साइड लगाए गए पौधे भी पानी न मिलने की वजह से सूख गए हैं। नगर निगम और जीडीए मालियों की लंबी फौज होने और सिंचाई के पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद शहर में लगाए गए इन पौधों का रखरखाव नहीं कर पा रहा है।पर्यावरणविद् आकाश वशिष्ठ का कहना है कि शहरों को सिर्फ कागजों में हरा-भरा बनाया जा रहा है। पौधरोपण के लक्ष्य के साथ-साथ इन पौधों की आठ साल तक मेंटेनेंस और रखरखाव का फंड भी सरकार को देना चाहिए। साल दर साल एक ही स्थान पर पौधे लगाए जाते हैं और अगले साल तक वह सूख जाते हैं। पूर्व महापौर अशु वर्मा का कहना है कि उनके कार्यकाल में जीडीए ने एनओसी लेकर शहर की ग्रीन बेल्ट को विकसित करने पर दो करोड़ रुपये खर्च किए थे लेकिन आज वह ग्रीन बेल्ट बर्बाद हो गई है। इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। जनता के पैसों का दुरुपयोग रुकना चाहिए। ग्रीन बेल्ट के रखरखाव के लिए टेंडर फिर से जारी किए जा चुके हैं। जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी कर ठाकुरद्वारा से डासना तक और एएलटी मार्ग की ग्रीन बेल्ट को रखरखाव के लिए कांट्रेक्ट दिया जाएगा। ग्रीन बेल्ट को फिर से हरा-भरा बनाया जाएगा। - शशि कुमार भारती, उद्यान प्रभारी, जीडीए नगर निगम के पार्कों में जो पौधे लगाए गए थे वह सभी पनप गए हैं। साईं उपवन के पीछे रैपिड कॉरिडोर की वजह से कुछ पौधे नष्ट हुए हैं। इस बार बरसात के सीजन में पौधे लगाकर क्षेत्रीय हेड माली और मालियों को संरक्षित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। - डॉ. अनुज कुमार सिंह, उद्यान प्रभारी, नगर निगम

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 17, 2022, 00:42 IST
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