गंगा एक्सप्रेसवे : 5700 युवाओं को मिलेगा रोजगार, नियमों के उल्लंघन पर सीधे चालान, मोबाइल पर आएगा मेसेज
सुबह के करीब 9 बजे। धूप अभी तेज नहीं हुई है, लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे के इस पैकेज पर हलचल शुरू हो चुकी है। दूर तक फैली नई-नकोर सड़क पर बीच-बीच में सफेद पट्टियां चमक रही हैं। हर किलोमीटर पर लगे कैमरे इस बात का संकेत दे रहे हैं कि यहां हर मूवमेंट रिकॉर्ड हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन करने से पहले अमर उजाला ने इस एक्सप्रेसवे के एक हिस्से पर ग्राउंड जीरो से हकीकत परखी। सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और रोजगार तीनों मोर्चों पर तस्वीर बदलती नजर आई। जैसे ही हमारी गाड़ी आगे बढ़ती है, कुछ दूरी पर लगे पोल पर कैमरा साफ दिखता है। साइट इंजीनियर बताते हैं कि पूरे 594 किलोमीटर में हर एक किलोमीटर पर एआई कैमरे हैं। ये भी पढ़ें - लखनऊ में 'विराट शो' के लिए ढीली करनी होगी जेब, दो से 50 हजार तक होगी कीमत, 7 मई को है मुकाबला ये भी पढ़ें - प्रदेश में अब दस दिनों तक लू और तपिश से मुक्ति, इन 58 जिलों में हल्की बारिश-वज्रपात का अलर्ट; चलेंगी हवाएं ये कैमरे सिर्फ स्पीड नहीं मापते, बल्कि सीट बेल्ट लगी है या नहीं, वाहन लेन में है या नहीं और ओवरस्पीडिंग या खतरनाक ड्राइविंग सब कुछ रियल टाइम में कैच होता है। ये कैमरे कंट्रोल रूम के साथ सीधे परिवहन विभाग से जुड़े हैं यानी नियमों का उल्लंघन होते ही सीधे चालान कटेगा और आपके मोबाइल पर मेसेज आ जाएगा। इसके अलावा करीब 5700 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है। सात सेंसर परखेंगे सड़क की सेहत:गंगा एक्सप्रेसवे की राइडिंग क्वालिटी और सड़क को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने पहली बार अत्याधुनिक स्विस तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसके तहत रियल-टाइम मॉनिटरिंग की गई। पहले परंपरागत रूप से सड़क की जांच निर्माण पूरा होने के बाद की जाती थी, लेकिन इस तकनीक की मदद से निर्माण के दौरान ही सड़क की गुणवत्ता और खामियों को परखा गया। एआई और सेंसर आधारित सिस्टम के लिए स्विटजरलैंड की कंपनी ईटीएच ज्यूरिख और आरटीडीटी लैबोरेटरीज एजी द्वारा विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेंसर मॉड्यूल का उपयोग किया जा रहा है। निरीक्षण के लिए सात हाई-प्रिसिजन (उच्च-सटीकत्ता) सेंसरों से लैस एक वाहन का उपयोग किया गया, जिसमें चार सेंसर सड़क की सतह की गुणवत्ता और एकरूपता की जांच के लिए हैं। तीन सेंसर वाहन के मोशन और यात्रियों के आराम को मापने के लिए हैं। यह तकनीक कंपन (वाइब्रेशन) और एक्सेलेरोमीटर के जरिए सड़क की ऊंचाई में उतार-चढ़ाव और सतह की सुगमता का डाटा एकत्र करती है, जिसे ऑनलाइन ग्राफ के माध्यम से वास्तविक समय में देखा जा सकता है। इस तरह निर्माण के दौरान ही खामियों का पता चलने से इंजीनियरों ने तुरंत सुधार किया। गंगा एक्सप्रेसवे के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर महावीर के मुताबिक यह पूरी तरह 'डायनामिक टेस्टिंग' है। यानी लैब नहीं, असली सड़क पर असली स्पीड में जांच। औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी का कहना है कि यह केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि नए भारत और नए उत्तर प्रदेश की तेज रफ्तार, सशक्त सोच और दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक है। आज प्रदेश एक्सप्रेसवे नेटवर्क के मामले में देश में अग्रणी बन रहा है, और गंगा एक्सप्रेसवे इस विकास यात्रा का एक मील का पत्थर साबित होगा। यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज के व्यापार, सेवा क्षेत्र और स्थानीय उद्योगों को नई गति देगा। संगम नगरी में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा और अधिक सहज होगी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 29, 2026, 10:23 IST
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