अल नीनो से निपटने की तैयारी: खरीफ फसलों के लिए बनेगा विशेष प्लान, कृषि मंत्री बोले- चिंता नहीं तैयारी की जरूरत

संभावित अल नीनो और कमजोर मानसून की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि वह खरीफ फसलों पर पड़ने वाले किसी भी प्रतिकूल असर से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि प्रभावित जिलों के लिए वैकल्पिक फसलों की योजना बनाई जा रही है और जरूरत पड़ने पर फसल पैटर्न में बदलाव भी किया जाएगा। चौहान ने चिंताओं पर क्या कहा दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में चौहान ने कहा कि चिंता करने की नहीं, तैयारी करने की जरूरत है। जिन जिलों पर असर पड़ सकता है, वहां कंटीजेंसी प्लान तैयार किए जाएंगे और आवश्यकता अनुसार फसल परिवर्तन पर विचार होगा। कृषि मंत्रालय क्या कर रहा तैयारी उन्होंने बताया कि कृषि मंत्रालय अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए वैकल्पिक फसलों के लिए जिलों की पहचान कर रहा है और बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर काम चल रहा है। हालांकि कृषि मंत्री ने कहा कि मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद देश 2025-26 फसल वर्ष में रिकॉर्ड 376.56 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन हासिल करने की दिशा में बढ़ रहा है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 18.8 मिलियन टन अधिक होगा। चावल उत्पादन को लेकर कृषि अनुसंधान परिषद ने क्या बताया सम्मेलन में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एम एल जाट ने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि देश 2047 के लिए तय चावल उत्पादन लक्ष्य पहले ही हासिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि अब धान की खेती वाले लगभग 15 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र को तिलहन और दलहन की ओर मोड़ने की जरूरत है, ताकि भारत इन फसलों में आत्मनिर्भर बन सके। जाट ने यह भी बताया कि देश के 100 से अधिक जिलों में वैज्ञानिक मानकों से अधिक उर्वरकों का उपयोग हो रहा है। उन्होंने मिट्टी की सेहत सुधारने, जैविक और जैव-उर्वरकों के इस्तेमाल को बढ़ाने वपोषक तत्वों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया। बीजों की गुणवत्ता को भी अहम मुद्दा बताते हुए उन्होंने कहा कि किसानों तक बेहतर गुणवत्ता वाले बीज पहुंचाने मात्र से उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत कृषि मंत्री चौहान ने वन नेशन, वन एग्रीकल्चर, वन टीम के तहत राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई। उन्होंने चेतावनी दी कि कृषि संबंधी बैठकों को लेकर राज्यों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को समय पर बीज वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज बढ़ाने, किसान आईडी जारी करने और नकली बीज, उर्वरक व कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। कृषि सचिव अतिश चंद्र ने कहा कि फसल विविधीकरण, कृषि आत्मनिर्भरता और टिकाऊ खेती अब सरकार की प्रमुख प्राथमिकताएं हैं और राज्यों को अपनी योजनाएं इन्हीं लक्ष्यों के अनुरूप तैयार करनी चाहिए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 28, 2026, 11:15 IST
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