Digital Delhi: ड्रोन सर्वे से जमीन को मिलेगी डिजिटल पहचान, दिल्ली के 30 गांव में स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड तैयार

दिल्ली में जमीन और मकानों के रिकॉर्ड रखने का दशकों पुराना तरीका अब बदलने की दहलीज पर है। राजधानी के 30 गांवों में स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड वितरण की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इसके साथ ही सरकार पूरे दिल्ली में हर संपत्ति को एक यूनीक डिजिटल नंबर देने की दिशा में भी काम कर रही है। इसका मतलब केवल नया कार्ड जारी करना नहीं है, बल्कि पहली बार किसी संपत्ति का पूरा डिजिटल इतिहास, उसकी सीमाएं, मालिकाना विवरण और सरकारी रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। अब तक दिल्ली के लाल डोरा क्षेत्रों में जमीन का रिकॉर्ड पुराने नक्शों, सीमित दस्तावेजों और स्थानीय जानकारी पर आधारित रहा है। कई बार एक ही जमीन पर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं, जिससे वर्षों तक विवाद चलते रहे। नई व्यवस्था में ड्रोन सर्वे के आधार पर हर संपत्ति का सटीक डिजिटल नक्शा तैयार किया गया है। इसी के आधार पर स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड जारी होंगे। भविष्य में यही रिकॉर्ड मालिकाना हक साबित करने का सबसे मजबूत आधार माना जाएगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड से न केवल लोगों को अपनी संपत्ति का प्रमाण आसानी से मिलेगा, बल्कि जमीन से जुड़े विवाद भी कम होंगे। साथ ही दिल्ली के विकास और शहरी नियोजन को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। कुछ इस तरह से चल रहा सर्वे स्वामित्व प्रॉपर्टी कार्ड योजना के तहत अब तक दिल्ली के 48 से अधिक गांवों का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इनमें से 30 गांवों के स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड तैयार हो चुके हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सहयोग से इन गांवों की संपत्तियों का ड्रोन सर्वे कराया गया। इसके बाद पटवारी टीम ने खसरा-खतौनी और पुराने रिकॉर्ड से मिलान कर डिजिटल नक्शे तैयार किए। जहां किसी संपत्ति को लेकर भ्रम की स्थिति सामने आई, वहां सर्वे टीम ने सीधे संपत्ति मालिकों से बातचीत कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की। विवादित संपत्तियों को फिलहाल इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, ताकि रिकॉर्ड पूरी तरह प्रामाणिक और विवादमुक्त रहे। एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड से बनेगा प्रशासनिक तालमेल अभी दिल्ली में जमीन का रिकॉर्ड अलग-अलग सरकारी विभागों के पास बंटा हुआ है। कहीं राजस्व विभाग का रिकॉर्ड है तो कहीं डीडीए, एमसीडी, वन विभाग, पीडब्ल्यूडी, कैंटोनमेंट बोर्ड या केंद्र सरकार की अन्य एजेंसियों का। एकीकृत डिजिटल लैंड रिकॉर्ड तैयार होने के बाद सभी विभाग एक ही प्रमाणित डाटा के आधार पर काम करेंगे। इससे विभागों के बीच समन्वय बढ़ेगा, योजनाओं का क्रियान्वयन आसान होगा और जमीन से जुड़े प्रशासनिक विवादों में भी कमी आएगी। दक्षिण-पश्चिम जिला बना सबसे बड़ा केंद्र योजना के पहले चरण में दक्षिण-पश्चिम जिला सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। यहां मटियाला और नजफगढ़ सब-डिवीजन के 17 गांवों में कुल 4,816 लाभार्थियों को स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड दिए जाएंगे। इनमें धांसा गांव में सबसे अधिक 1,323 लाभार्थी हैं। इसके बाद ईसापुर में 823, शिकारपुर में 393, कंगनहेड़ी में 288 और रावता में 287 लोगों को कार्ड मिलेंगे। इसके अलावा बाहरी उत्तर जिले के 10 गांवों में 3,027, दक्षिण जिले के दो गांवों में 541 और उत्तर-पश्चिम जिले के एक गांव में 198 लाभार्थियों को कार्ड वितरित किए जाएंगे। पहले चरण में कुल 30 गांवों के 8,582 लोगों को इसका लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों की राय मेरा मानना है कि इसका सबसे बड़ा लाभ आम लोगों को मिलेगा। प्रॉपर्टी आधार बनने से मालिकाना हक स्पष्ट होगा और खरीद-बिक्री के दौरान लोगों के साथ धोखाधड़ी की आशंका काफी कम हो जाएगी। एक ही संपत्ति को कई बार बेचना मुश्किल होगा। मकानों की डिजिटल मैपिंग होने से अवैध निर्माण पर भी प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही सरकार को बेहतर राजस्व संग्रह का भी फायदा मिलेगा। - बीपी सिंह, टाउन प्लानर अभी लाल डोरा क्षेत्रों की कई संपत्तियां बैंकिंग व्यवस्था में पूरी तरह स्वीकार नहीं हो पातीं, जिससे लोगों को औपचारिक बैंक ऋण लेने में कठिनाई होती है। मेरा मानना है कि स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड मिलने के बाद यही दस्तावेज बैंक के सामने मालिकाना हक का मजबूत प्रमाण बनेगा। इससे लोग अपनी संपत्ति को गिरवी रखकर घर के विस्तार, कारोबार या बच्चों की शिक्षा के लिए आसानी से संस्थागत ऋण प्राप्त कर सकेंगे। -शमशेर सिंह, शहरी नियोजक आसान शब्दों में समझें ये कार्ड सबके लिए क्यों जरूरी मालिकाना हक की पहचान करना होगा आसान। संपत्ति को गिरवी रखकर बैंक से ऋण लेना होगा सरल। पक्के दस्तावेज मिलने से जमीन-जायदाद के विवाद कम होंगे। कागजी दस्तावेजों की जगह आधार कार्ड जैसा छोटा प्लास्टिक कार्ड मिलेगा। होलोग्राम, यूवी स्याही और माइक्रोटेक्स्ट जैसी सुरक्षा तकनीक से इसकी नकल करना आसान नहीं होगा। क्यूआर कोड स्कैन कर कुछ ही सेकंड में पूरी जानकारी देखी जा सकेगी। क्यूआर स्कैन करते ही फार्म-13 खुलेगा, जिसमें संपत्ति का पूरा विवरण उपलब्ध होगा। डिजिटल नक्शे में उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम की सीमाओं के साथ पड़ोसी संपत्तियों की आईडी भी दिखाई देगी। खसरा नंबर के साथ निर्मित और खुले क्षेत्रफल का पूरा विवरण मिलेगा। मालिक, पिता, पति और सह-हिस्सेदारों की जानकारी दर्ज रहेगी। अधिकृत तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षर और सरकारी मुहर भी उपलब्ध होगी। यह कार्ड नियमों की धारा-36 के तहत बैंक ऋण के लिए मान्य दस्तावेज होगा। पहले चरण में इन 30 गांवों में मिलेंगे स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड/गांव और लाभार्थी बाडूसराय 259 दौराला 137 घुमनहेड़ा 281 झटीकरा 158 कंगनहेड़ी 288 रघोपुर 19 नानकहेड़ी 155 शिकारपुर 393 गालिबपुर 131 रावता 287 कैर 31 मुंधेला कलां 72 मुंधेला खुर्द 132 सुरखपुर 104 ईसापुर 823 बक्करगढ़ 223 धांसा 1,323 छतेसर (टटेसर) 203 निजामपुर 870 बकोली 346 हमीदपुर 145 पल्ला 525 सिंघोला 247 ताजपुर कलां 175 शाहपुर गढ़ी 93 औचांदी 279 मुंगेशपुर 144 फतेहपुर बेरी 372 छंदनहौला 169 सुल्तानपुर माजरा 198

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 01, 2026, 01:58 IST
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